US Visa Bond Program: अमेरिका जाने की चाहत रखने वाले लोगों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिकी सरकार ने अपने ‘वीजा बॉन्ड प्रोग्राम’ (US Visa Bond Program) को अब हमेशा के लिए स्थायी (Permanent) कर दिया है. फेडरल रजिस्टर में जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, 3 अगस्त से लागू होने वाले इस नए नियम के तहत 50 देशों के नागरिकों को बिजनेस (B-1) और टूरिस्ट (B-2) वीजा जारी होने से पहले 20,000 डॉलर (करीब 17 लाख रुपये) तक का सिक्योरिटी बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है.
भारत के लिए राहत की बात (US visa relief for India)
इस कड़े वीजा नियम में भारतीय नागरिकों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि भारत इस 50 देशों की सूची में शामिल नहीं है. यानी भारतीय यात्रियों को बिजनेस या टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका जाते समय कोई बॉन्ड या सिक्योरिटी मनी जमा नहीं करानी होगी. हालांकि, भारत के पड़ोसी देश जैसे बांग्लादेश, नेपाल और भूटान को इस सूची में शामिल किया गया है, जिन्हें वीजा अधिकारियों के मांगने पर यह भारी-भरकम बॉन्ड देना होगा.
अब लगेगा $20,000 का बॉन्ड (US visa $20,000 bond)
आपको बता दें कि अमेरिकी सरकार ने साल 2025 में इस योजना की शुरुआत एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की थी. इसका मुख्य उद्देश्य वीजा की तय अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में अवैध रूप से रुकने वाले (Overstaying) लोगों को रोकना था. पायलट प्रोजेक्ट के सफल परिणामों के बाद अब इसे स्थायी रूप से लागू कर दिया गया है. पहले इस योजना में 5,000, 10,000 और 15,000 डॉलर तक का बॉन्ड था, लेकिन अब 5,000 डॉलर वाले विकल्प को खत्म कर दिया गया है और अधिकतम राशि बढ़ाकर $20,000 कर दी गई है.
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असली यात्रियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ (US visa overstay policy)
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से लोग वीजा की शर्तों का कड़ाई से पालन करेंगे, लेकिन इसके साथ ही 50 देशों के असली और व्यापारिक यात्रियों पर भारी आर्थिक बोझ भी पड़ेगा. ट्रंप प्रशासन इससे पहले भी कई वीजा श्रेणियों की फीस बढ़ा चुका है और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच भी सख्त कर चुका है. फिलहाल के लिए, भारतीय यात्रियों को इस अतिरिक्त वित्तीय और कागजी बोझ से पूरी तरह बाहर रखा गया है.
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