Datia by-election: मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया सीट हमेशा से चर्चा में रही है. हाल ही में हुए उपचुनाव में यहां का माहौल कुछ अलग ही था. लोग सड़कों पर ‘दादा नहीं तो राजा सही’ के नारे लगा रहे थे. दरअसल, दादा यानी नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिला और उनकी जगह कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह मैदान में उतरे. जनता का गुस्सा और नाराजगी इस नारे में साफ झलक रही थी.
टिकट पर असंतोष
बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया. यह फैसला कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को रास नहीं आया. मिश्रा लंबे समय से दतिया की राजनीति का चेहरा रहे हैं. जब उन्हें दरकिनार किया गया तो लोगों ने नाराजगी जाहिर की और कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनने लगा.
जनता का मूड
नारे सिर्फ नाराजगी का इजहार नहीं थे बल्कि यह जनता के मूड का संकेत भी थे. लोग कह रहे थे कि अगर दादा नहीं हैं तो राजा यानी कांग्रेस का उम्मीदवार ही सही. इस तरह का माहौल चुनावी नतीजों पर असर डालता है और यही हुआ. कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की.
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राजनीति का संदेश
दतिया की इस घटना ने साफ कर दिया कि जनता टिकट वितरण में गड़बड़ी को आसानी से बर्दाश्त नहीं करती. लोग अपने नेता से भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं और जब उन्हें किनारे किया जाता है तो विरोध का रूप नारे और वोट दोनों में दिखता है. ‘दादा नहीं तो राजा सही’ सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि जनता की आवाज थी जिसने चुनावी समीकरण बदल दिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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