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Property Buying Tips: अपनी जमा-पूंजी लगाकर जमीन या प्लॉट खरीदते समय केवल बेचने वाले के वादों पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है. प्रॉपर्टी डीलिंग में धोखाधड़ी और कानूनी विवादों से बचने के लिए रजिस्ट्री के साथ-साथ कई सरकारी दस्तावेजों का मिलान करना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं वे 7 कौन से मुख्य कागज हैं, जिन्हें देखे बिना सौदा कभी पक्का नहीं करना चाहिए.
जमीन या प्लॉट खरीदते समय धोखेधड़ी से बचने के लिए सेल डीड, मदर डीड, खसरा-खतौनी, म्यूटेशन, ईसी, भू-नक्शा और कोर्ट केस स्टेटस की पूरी जांच करनी चाहिए. सही कागजात और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान ही आपके निवेश को सुरक्षित बनाता है.
मालिकाना हक और इतिहास: सेल डीड और मदर डीड की जांच
जमीन खरीदने की प्रक्रिया में सबसे पहला दस्तावेज सेल डीड (रजिस्ट्री) होता है, जिससे वर्तमान मालिक के नाम और जमीन के क्षेत्रफल का पता चलता है. इसके बाद मदर डीड (पुराना मालिकाना रिकॉर्ड) देखना अनिवार्य है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह जमीन वर्तमान विक्रेता के पास कैसे आई और इससे पहले इसके मालिक कौन-कौन थे. इन दोनों दस्तावेजों के जरिए जमीन के मालिकाना हक की पूरी कड़ी साफ हो जाती है.
सरकारी रिकॉर्ड और कर्ज का ब्योरा: खसरा-खतौनी व EC
केवल कागजी रजिस्ट्री पर संतुष्ट न होकर खसरा-खतौनी या जमाबंदी के सरकारी ऑनलाइन/ऑफलाइन रिकॉर्ड से जमीन के रकबे का मिलान करें. इसके साथ ही इनकंब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) निकलवाएं, जिससे यह पता चलता है कि जमीन पर कोई बैंक लोन, बंधक या अन्य वित्तीय देनदारी तो दर्ज नहीं है. अगर जमीन गिरवी रखी गई होगी, तो ईसी से उसकी तुरंत जानकारी मिल जाएगी.
नामांतरण, नक्शा और अदालती विवाद: म्यूटेशन व लीगल केस स्टेटस
जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) यह साबित करता है कि सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में विक्रेता का नाम दर्ज है या नहीं. इसके अलावा जमीन का नक्शा और मौके की चौहद्दी जरूर नापें, ताकि कागजी क्षेत्रफल और धरातल की स्थिति में अंतर न हो. सबसे अंत में यह पक्का करें कि उस जमीन पर कोई पारिवारिक झगड़ा या कोर्ट केस तो नहीं चल रहा है. किसी भी संशय की स्थिति में लीगल एक्सपर्ट से कागजात जरूर सत्यापित कराएं.
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-भारत एक्सप्रेस
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