देश की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती संस्था संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी स्थापना के 100 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं. इस ऐतिहासिक अवसर पर गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में सालभर से चल रहे शताब्दी समारोह का भव्य समापन हुआ. पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और एक विशाल सभा को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने आयोग की एक सदी लंबी यात्रा को याद करते हुए कई विशेष चीजों का अनावरण किया.
डाक टिकट और पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1926 से लेकर 2026 तक के सफर को यादगार बनाने के लिए कई सौगातें दीं. यूपीएससी की एक सदी पूरी होने पर विशेष रूप से तैयार किया गया शताब्दी स्मारक सिक्का और एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया. प्रधानमंत्री ने ‘भारत में यूपीएससी और लोक सेवा आयोगों की नीतियों को आकार देने वाले 100 ऐतिहासिक निर्णय’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया.
इस भव्य आयोजन में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष, सदस्य, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद और देश भर के अन्य प्रतिष्ठित हितधारक शामिल हुए. यह कार्यक्रम 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय ‘शताब्दी समारोह – मंथन’ का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें पैनल चर्चाओं और प्रख्यात वक्ताओं के संबोधन के जरिए देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर मंथन किया गया.
1926 से लेकर आज तक का सफर
संघ लोक सेवा आयोग की संस्थागत यात्रा 1 अक्टूबर 1926 को शुरू हुई थी, जब भारत का पहला लोक सेवा आयोग एक सलाहकार संस्था के रूप में बनाया गया था. समय के साथ इसके स्वरूप और जिम्मेदारियों में व्यापक बदलाव आए और यह आज एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में देश की सेवा कर रहा है. सालों में संस्था का दायरा और परीक्षाएं काफी जटिल व विशाल हुई हैं.
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जहां 1950-51 में परीक्षाओं के लिए कुल आवेदन मात्र 42,727 थे, वहीं 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 45,10,044 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. यानी सौ गुना से भी अधिक की भारी बढ़ोतरी. शुरुआती दौर (1949-51) में जहां सिविल सेवाओं में महिलाओं की संख्या न के बराबर थी, वहीं सीएसई 2025 में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 31.2 प्रतिशत हो गई है, जिसमें उन्होंने टॉप 25 रैंकों में से 11 पर कब्जा जमाया था.
वर्तमान में आयोग के चेयरमैन अजय कुमार हैं और इसके 8 सदस्यों (जिनमें 3 महिलाएं शामिल हैं) की टीम देश की सबसे पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया को संभाल रही है. प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन और इन ऐतिहासिक पलों ने देश के युवाओं और सिविल सेवा के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया है.
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