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भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा खरीद: 114 राफेल लड़ाकू विमानों का इतने लाख करोड़ रुपये में होगा सौदा, फ्रांस से कब-कैसे मिलेंगे?

BIGGEST DEFENCE DEAL IN INDIAN HISTORY: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने घोषणा की है कि भारत 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद को अंतिम रूप देने वाला है. करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस सौदे के पूरा होने के बाद भारत के पास कुल 176 राफेल विमानों का विशाल बेड़ा होगा.

Rafale Fighter Jets

राफेल लड़ाकू विमान

India 114 Rafale Deal: भारतीय वायुसेना (IAF) की लड़ाकू क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार की दिशा में देश की सबसे बड़ी रक्षा खरीद को अंतिम रूप देने की तैयारी तेज हो गई है. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने एयर फोर्स डे से पहले आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यदि सभी योजनाएं समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ती हैं, तो भारत वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की मेगा खरीद का सौदा फ्रांस के साथ अंतिम रूप दे सकता है.

इस मेगा रक्षा सौदे की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है. भारत सरकार ने इस वर्ष फरवरी में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी. इसे फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है.

भारत के पास होंगे पौने दो सौ राफेल लड़ाकू विमान

राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया लगभग दो दशक पहले शुरू हुई मूल निविदा के बाद अब निर्णायक मुकाम पर पहुंची है. इस सौदे के पूरा होते ही भारतीय सैन्य बलों के पास कुल 176 राफेल लड़ाकू विमानों का बेड़ा तैयार हो जाएगा.

भारतीय वायुसेना: पहले से 36 राफेल विमान.

भारतीय नौसेना: आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य के लिए ऑर्डर किए गए 26 राफेल-एम (Rafale-M) नौसैनिक फाइटर जेट.

प्रस्तावित नए विमान: 114 राफेल विमान (MRFA कार्यक्रम के तहत).

Rafale Deal India

वायुसेना प्रमुख ने घटते लड़ाकू स्क्वाड्रनों पर चिंता जताते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना को अपनी स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की क्षमता हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में सालाना कम से कम 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की आवश्यकता होगी. उन्होंने वायुसेना को ‘एआई-सक्षम’ (AI-enabled) बल बनाने और स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने पर जोर दिया. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, फ्रांस के साथ इस डील के तहत भारत में लड़ाकू विमान निर्माण की दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित होगी, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा.

राफेल की खूबियां और भारत को मिलने वाले एसेट्स

राफेल 4.5 पीढ़ी का एक अत्याधुनिक, ट्विन-इंजन ऑम्नीरोल (Omnirole) लड़ाकू विमान है:

घातक हथियार प्रणाली: राफेल ‘मिटिओर’ (Meteor) बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (150+ किमी रेंज) से लैस है, जिसकी नो-एस्केप ज़ोन दुनिया में सबसे अधिक है. इसके अलावा 300 किमी तक जमीन पर सटीक प्रहार करने वाली स्कैल्प (SCALP) क्रूज मिसाइल और लो-एल्टीट्यूड पर बंकर उड़ाने वाली हैमर (HAMMER) स्मार्ट वेपन इसे अजेय बनाते हैं.

भारत-विशिष्ट संवर्द्धन (ISE): भारत को मिलने वाले राफेल में लेह-लद्दाख जैसे अत्यधिक ऊंचे और ठंडे एयरबेस से त्वरित उड़ान के लिए कोल्ड-स्टार्ट क्षमता, इजरायली हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले, रडार वार्निंग रिसीवर, 10 घंटे का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और आधुनिक जैमर लगे हैं.

आरबीई-2 एईएसए रडार और स्पेक्ट्रा ईडब्ल्यू सूट: राफेल का AESA रडार एक साथ 40 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है, जबकि इसका स्पेक्ट्रा (SPECTRA) इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम दुश्मन के रडार और मिसाइलों को जाम कर ‘डिजिटल स्टील्थ’ प्रदान करता है.

su 57 jet russia india

रूसी सुखोई-57 (Su-57 Felon): कितना खास, कितना सस्ता?

भारतीय वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि यदि स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के ‘एएमसीए’ (AMCA) प्रोजेक्ट में देरी होती है, तो वायुसेना अन्य विकल्पों पर विचार कर सकती है. रूस ने भारत को अपने 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर सुखोई-57 (Su-57) की पेशकश की है, हालांकि इस पर अभी कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ है.

सुखोई-57 की खासियत: यह रूस का इकलौता 5वीं पीढ़ी का सुपर-मैन्युवरेबल स्टील्थ फाइटर है. इसमें 3D थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजन लगे हैं, जो इसे हवा में अविश्वसनीय कलाबाजियां खाने की क्षमता देते हैं. इसमें आंतरिक हथियार बे (Internal Weapon Bays) और लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइलें (जैसे R-37M) ले जाने की क्षमता है.

लागत में सस्ता: अमेरिकी F-35 (प्रति विमान करीब 80-100 मिलियन डॉलर) और राफेल की समग्र लाइफ-साइकिल लागत की तुलना में सुखोई-57 की बेस यूनिट लागत (लगभग 40-50 मिलियन डॉलर) काफी किफायती मानी जाती है.

अमेरिका (F-35, F-22) और चीन (J-20) से तुलना

स्टील्थ में पीछे: अमेरिकी F-22 और F-35 स्टील्थ (रडार से अदृश्य रहने) और एवियोनिक्स के मामले में Su-57 से काफी आगे हैं. सुखोई-57 का रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) अमेरिकी विमानों से काफी अधिक है.

चीन के J-20 माइटी ड्रैगन से मुकाबला: चीन ने 200 से अधिक J-20 तैनात कर लिए हैं. हालांकि चीनी फाइटर के इंजन और एवियोनिक्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन संख्याबल में चीन आगे है. सुखोई-57 डॉगफाइट और गति में चीनी J-20 से बेहतर है, लेकिन उत्पादन और एवियोनिक्स मैच्योरिटी में रूस अभी सीमित है.

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LCA Tejas Fighter Jet

स्वदेशी LCA तेजस मार्क-1A प्रोग्राम की वर्तमान स्थिति

भारतीय वायुसेना के स्वदेशीकरण की रीढ़ एलसीए तेजस मार्क-1ए (LCA Tejas Mk-1A) है. रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को कुल 83 तेजस Mk-1A और बाद में 97 अतिरिक्त विमानों का ऑर्डर दिया है (कुल 180 विमान).

वर्तमान ऑपरेशनल स्थिति: भारतीय वायुसेना के पास पहले से 2 स्क्वाड्रन में लगभग 32 से 34 तेजस Mk-1 (IOC/FOC कॉन्फ़िगरेशन) और ट्रेनर विमान पूरी तरह ऑपरेशनल हैं.

Mk-1A की डिलीवरी स्थिति: अमेरिकी कंपनी जीई (GE) द्वारा F404 इंजनों की आपूर्ति में देरी के चलते पहले बैच के तेजस Mk-1A की आधिकारिक स्क्वाड्रन डिलीवरी में कुछ महीनों का विलंब हुआ है. एचएएल ने उत्पादन पूरा कर परीक्षण उड़ानें पूरी कर ली हैं और शुरुआती एयरक्राफ्ट वायुसेना को हैंडओवर करने की प्रक्रिया के अंतिम चरण में हैं.

उन्नत क्षमताएं: रक्षा सचिव के अनुसार इसे “स्पाइरल डेवलपमेंट मॉडल” पर ढाला जा रहा है, जिसमें इजरायली EL/M-2052 के बाद अब स्वदेशी ‘उत्तम’ AESA रडार, हवा में ईंधन भरने की क्षमता, उन्नत सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर और स्वदेशी ‘अस्त्र’ मिसाइलें शामिल की जा रही हैं, जो इसे वैश्विक समकक्षों से कहीं बेहतर बनाती हैं.

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