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नटराजासन करने से पहले जरूर करें ये 7 योगासन, बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने में मिलेगी मदद; जानें सही तैयारी

Natarajasana Preparatory Yoga Poses: नटराजासन एक कठिन बैलेंसिंग और बैकबेंड योगासन है, जिसे करने से पहले शरीर को पर्याप्त रूप से तैयार करना जरूरी होता है. सूर्य नमस्कार, वृक्षासन, आंजनेयासन समेत 7 योगाभ्यास शरीर के लचीलेपन, संतुलन और मजबूती पर काम करने में मदद कर सकते हैं.

Natarajasana Preparatory Yoga Poses

Natarajasana Preparatory Yoga Poses- bharat express

Natarajasana Preparatory Yoga Poses: योग में किसी भी कठिन आसन को सीधे करने के बजाय शरीर को उसके लिए तैयार करना बेहद जरूरी माना जाता है. इसे पूर्व-अभ्यास कहा जाता है. खासतौर पर नटराजासन जैसे आसन में, जिसमें पूरे शरीर का संतुलन एक पैर पर बनाना होता है और शरीर को पीछे की ओर मोड़ना पड़ता है, तैयारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. भगवान शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित नटराजासन देखने में जितना सुंदर है, इसे साधना उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है. इसमें पैरों, कूल्हों, कमर, कंधों और छाती में पर्याप्त लचीलापन के साथ-साथ एकाग्रता और संतुलन की जरूरत होती है. बिना तैयारी के इस आसन का अभ्यास करने से मांसपेशियों में खिंचाव या चोट का जोखिम बढ़ सकता है. इसलिए नटराजासन से पहले कुछ आसान योगाभ्यासों और स्ट्रेचिंग के जरिए शरीर को खोलना और संतुलन के लिए तैयार करना बेहतर होता है.

 सूर्य नमस्कार: शरीर को वार्म-अप करने की पहली सीढ़ी

नटराजासन से पहले सूर्य नमस्कार एक प्रभावी वार्म-अप की तरह काम कर सकता है. इसके अभ्यास से शरीर में गर्माहट आती है और मांसपेशियां आगे के कठिन अभ्यास के लिए तैयार होती हैं. साथ ही शरीर के लचीलेपन और संतुलन पर भी काम होता है. नटराजासन में बैकबेंड और बैलेंस दोनों शामिल होते हैं, इसलिए शरीर को अचानक कठिन मुद्रा में ले जाने के बजाय पहले सूर्य नमस्कार जैसे अभ्यास से तैयार करना उपयोगी माना जाता है.

 वृक्षासन: एक पैर पर संतुलन का अभ्यास

नटराजासन की सबसे बड़ी चुनौती है—एक पैर पर शरीर का संतुलन बनाए रखना. ऐसे में वृक्षासन इसकी तैयारी के लिए बेहद उपयोगी अभ्यास हो सकता है. वृक्षासन में एक पैर पर खड़े होकर शरीर को स्थिर रखने का अभ्यास किया जाता है. इससे संतुलन, एकाग्रता और शरीर की स्थिरता पर काम होता है, जो नटराजासन के लिए बुनियादी जरूरत हैं.

 आंजनेयासन: कूल्हों और जांघों को खोले

नटराजासन में एक पैर को पीछे की ओर उठाकर ऊपर ले जाना होता है. इसके लिए कूल्हों और जांघों के सामने के हिस्से में पर्याप्त लचीलापन जरूरी है. आंजनेयासन हिप फ्लेक्सर्स और जांघों के सामने के हिस्से को स्ट्रेच करने में मदद करता है. इसलिए इसे नटराजासन से पहले करने से शरीर को गहरी मुद्रा के लिए तैयार किया जा सकता है.

धनुरासन: बैकबेंड की तैयारी

नटराजासन में शरीर को पीछे की ओर मोड़ना पड़ता है. ऐसे में धनुरासन को इसकी तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अभ्यास माना जा सकता है. धनुरासन में कंधों, छाती और जांघों पर एक साथ काम होता है और शरीर को पीछे की ओर झुकने की आदत पड़ती है. इससे नटराजासन जैसे अधिक चुनौतीपूर्ण बैकबेंड के लिए शरीर को तैयार करने में मदद मिल सकती है.

 भुजंगासन: पीठ को दें मजबूती

नटराजासन में केवल लचीलापन ही नहीं, बल्कि शरीर के पिछले हिस्से की मजबूती भी जरूरी होती है. खासतौर पर रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत और सक्रिय रखना महत्वपूर्ण है. भुजंगासन पीठ के ऊपरी और मध्य हिस्से को सक्रिय करता है और शरीर को पीछे की ओर झुकने वाले अभ्यासों के लिए तैयार करता है. इससे नटराजासन के दौरान शरीर को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है.

वीरभद्रासन: पैरों की ताकत और स्थिरता बढ़ाएं

नटराजासन में संतुलन के साथ पैरों की ताकत और शरीर की स्थिरता भी महत्वपूर्ण होती है. वीरभद्रासन पैरों को सक्रिय करने और शरीर के संतुलन पर काम करने वाला उपयोगी अभ्यास है. नियमित अभ्यास से शरीर को चुनौतीपूर्ण योग मुद्राओं के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, नटराजासन करते समय कमर पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना जरूरी है.

 एकपाद राजकपोतासन: कूल्हों को खोलने में मददगार

नटराजासन में उठे हुए पैर को पीछे और ऊपर की ओर ले जाना होता है. इसके लिए कूल्हों में अच्छा लचीलापन होना जरूरी है. एकपाद राजकपोतासन कूल्हों को खोलने और पैरों में लचीलापन बढ़ाने के लिए किया जाता है. इसी वजह से इसे नटराजासन के लिए एक उपयोगी प्रिपरेटरी आसन माना जा सकता है. हालांकि, यह स्वयं भी गहरा स्ट्रेच देने वाला आसन है, इसलिए इसे अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए.

नटराजासन से पहले तैयारी क्यों जरूरी है?

नटराजासन केवल एक पैर पर खड़े होने का आसन नहीं है. इसमें संतुलन, एकाग्रता, कूल्हों का लचीलापन, कंधों और छाती का खुलाव, पैरों की मजबूती और रीढ़ की गतिशीलता—इन सभी का तालमेल जरूरी होता है. इसलिए शरीर को बिना तैयार किए सीधे नटराजासन करने के बजाय पहले वार्म-अप और कुछ प्रिपरेटरी आसनों का अभ्यास करना बेहतर है. इससे शरीर को मुद्रा के लिए तैयार करने में मदद मिलती है और गलत तरीके से खिंचाव पड़ने का जोखिम कम किया जा सकता है.

ध्यान रखें: योग का अभ्यास अपनी क्षमता के अनुसार करें. किसी भी आसन में दर्द महसूस होने पर जबरदस्ती मुद्रा में जाने के बजाय अभ्यास रोकें. चोट, पीठ या जोड़ों से जुड़ी समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही कठिन आसनों का अभ्यास करें.

भारत एक्सप्रेस



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