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‘इजरायल से बात करना गद्दारी नहीं’, PAK एक्सपर्ट की शहबाज शरीफ को सलाह… क्या मुस्लिमों को धोखा देगा पाकिस्तान?

Pakistan Foreign Policy: इजरायल से बातचीत को गद्दारी न मानते हुए पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने शहबाज सरकार को बैक-चैनल कूटनीति अपनाने की सलाह दी है.

पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने इजरायल के साथ बैक-चैनल बातचीत की दी सलाह.

Pakistan Foreign Policy: पाकिस्तान और इजरायल के रिश्तों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. पाकिस्तान अब्राहमिक मूवमेंट के चेयरमैन और जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट खुर्रम अली रजा ने शहबाज शरीफ सरकार को सलाह दी है कि इजरायल के साथ बातचीत और कूटनीतिक संपर्क का मतलब गद्दारी या घुटने टेकना नहीं है.

पाकिस्तानी एक्सपर्ट खुर्रम अली रजा ने तर्क दिया है कि पाकिस्तान को इजरायल के साथ बैक-चैनल कूटनीति का रास्ता खोलना चाहिए. उनका मानना है कि फिलिस्तीन के अधिकारों का समर्थन करते हुए भी इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को समझा जा सकता है और औपचारिक मान्यता दिए बिना बातचीत करना कोई गद्दारी नहीं है.

इजरायल को मान्यता दिए बिना भी हो सकती है बातचीत

खुर्रम अली रजा ने ‘यरूशलम पोस्ट’ में लिखे एक लेख में कहा कि औपचारिक मान्यता देना और बातचीत करना दो अलग बातें हैं. देश उन सरकारों से भी संपर्क रखते हैं जिनसे उनके गहरे मतभेद होते हैं. पाकिस्तान औपचारिक मान्यता दिए बिना भी मध्यस्थों या बैक-चैनल कूटनीति के जरिए इजरायल से नियंत्रित बातचीत का रास्ता अपना सकता है.

फिलिस्तीन का समर्थन और इजरायल का अस्तित्व

लेख में तर्क दिया गया है कि पाकिस्तान फिलिस्तीनियों के आत्म-निर्णय के अधिकार का समर्थन जारी रखते हुए भी इजरायल को एक स्थायी वास्तविकता के रूप में स्वीकार कर सकता है. इजरायल के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता और उसके नागरिकों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को समझना भी जरूरी है. पाकिस्तान एक साथ फिलिस्तीन की आजादी और इजरायल की सुरक्षा दोनों की वकालत कर सकता है.

क्या रातोंरात बदलेगी पाकिस्तान की विदेश नीति?

पाकिस्तान आधिकारिक रूप से इजरायल को देश नहीं मानता और 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) का समर्थन करता है. पाकिस्तान में इजरायल से संबंध बनाने की बात करना ‘राजनीतिक आत्महत्या’ माना जाता है, यही वजह है कि पूर्व पीएम इमरान खान भी ‘अब्राहम अकॉर्ड’ में शामिल होने से पीछे हट गए थे.

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-भारत एक्सप्रेस



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