BJP and Congress Unite Jammu Kashmir: रवि शर्मा/जम्मू-कश्मीर: सियासत में एक-दूसरे के धुर विरोधी मानी जाने वाली पार्टियां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, जम्मू-कश्मीर में अचानक एक ही सुर में बोलते नजर आ रही है. कश्मीर घाटी से लेकर जम्मू तक अक्सर हर नीति और बयान पर आमने-सामने रहने वाली इन दोनों पार्टियों ने महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के खिलाफ साझा मोर्चा खोल दिया है. आखिर क्या है इस अप्रत्याशित सियासी एकजुटता की वजह?
इस मेल के पीछे का सबसे बड़ा कारण बना है किश्तवाड़ में पीडीपी के एक नेता का दिया गया वह विवादित बयान. इसमें हिजबुल मुजाहिदीन के मारे गए कुख्यात आतंकी कमांडर बुरहान वानी को ‘शहीद’ बता दिया गया.
बुरहान वानी पर विवादित टिप्पणी (Jammu Kashmir Burhan Wani Martyr Controversy)
विवाद की शुरुआत किश्तवाड़ स्थित सरकारी डाक बंगले में आयोजित पीडीपी कार्यकर्ताओं की एक बैठक से हुई. बैठक के दौरान पार्टी की राजनीतिक यात्रा, महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व और वर्ष 2014 में बनी पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार सहित अन्य सियासी पहलुओं पर चर्चा चल रही थी. इसी दौरान पीडीपी नेता अब्दुल कबीर (मोहम्मद कबीर) ने हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व पोस्टर बॉय बुरहान वानी का जिक्र करते हुए उसे ‘शहीद’ कह डाला.
नहीं हो पाया डैमेज कंट्रोल (Jammu Kashmir PDP Leader On Burhan Wani)
बयान का वीडियो बाहर आते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया. चौतरफा घिरने के बाद अब्दुल कबीर ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए इसे अपनी ‘व्यक्तिगत राय’ बताया और तर्क दिया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां संविधान ने उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी दी है. हालांकि, उनकी इस सफाई ने आग में घी डालने का काम किया.
वानी शहीद तो आतंकवादी कौन?
पीडीपी नेता की इस टिप्पणी पर सबसे पहले कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया. पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने इस बयान की तीखी निंदा करते हुए कहा कि-
‘हमने इस तथाकथित नेता का नाम पहली बार सुना है. हमारा सीधा सवाल है-अगर बुरहान वानी शहीद है, तो फिर इस देश में आतंकवादी कौन है? कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर ऐसे किसी भी राष्ट्रविरोधी बयान का समर्थन नहीं करती.’
बीजेपे याद दिलाया 2016
इसके साथ ही रविंदर शर्मा ने बीजेपी पर भी तंज कसा और याद दिलाया कि 2016 में जब बुरहान वानी मारा गया था, तब गठबंधन सरकार में बीजेपी कोटे से रहे तत्कालीन उपमुख्यमंत्री ने भी उस एनकाउंटर को एक ‘हादसा’ करार दिया था.
ये भी पढ़ें: एलन मस्क के स्टारलिंक विवाद में क्यों लिया जा रहा है मुंबई के 26/11 का नाम?
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने पीडीपी पर अलगाववाद को खाद-पानी देने का आरोप लगाते हुए सीधा महबूबा मुफ्ती को घेरा. सत शर्मा ने कहा कि
‘पीडीपी नेताओं की मानसिकता हमेशा से अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली रही है. किश्तवाड़ में एक दुर्दांत आतंकवादी को शहीद का दर्जा देना बेहद गंभीर और अक्षम्य अपराध है. पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को तुरंत सामने आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उनकी पार्टी एक आतंकवादी को शहीद मानती है?’
सत शर्मा ने आगे कहा कि आज जम्मू-कश्मीर का मिजाज बदल चुका है. यहां का युवा अब आतंक और बंदूक के रास्ते को नकारकर देश की मुख्यधारा और राष्ट्रहित की बात कर रहा है, लेकिन पीडीपी जैसी पार्टियां पुराने ढर्रे पर लौटकर माहौल बिगाड़ने की साजिश रच रही हैं.
ये भी पढ़ें: शारदीय नवरात्रि के व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी?
बीजेपी और कांग्रेस ने सुर से कठघरे में पीडीपी (Jammu Kashmir Politics Over Burhan Wani)
आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मसले पर जम्मू-कश्मीर में वैचारिक दीवारें गिरती दिखी हैं. बुरहान वानी को शहीद बताए जाने पर जिस तरह बीजेपी और कांग्रेस ने एक सुर में पीडीपी को कठघरे में खड़ा किया है, उसने यह साफ संदेश दिया है कि घाटी की स्थानीय राजनीति में वोटों के ध्रुवीकरण के लिए आतंकी तत्वों की पैरवी को अब किसी भी मुख्यधारा के राष्ट्रीय दल का समर्थन मिलना नामुमकिन है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
