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CEC पर घमासान: सुप्रीम कोर्ट मार्च से पहले रोका गया INDIA ब्लॉक, राहुल गांधी की टीम ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

INDIA Bloc Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन तेज हो गया है. राहुल गांधी, अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट मार्च की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें मंडी हाउस पर रोक दिया.

Opposition takes to the streets again against the Election Commissioner.

चुनाव आयुक्त के खिलाफ फिर सड़क पर विपक्ष

INDIA Bloc Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक ने सोमवार को एक बार फिर ताकत दिखाई. विपक्षी दलों ने बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने इस मार्च को मंडी हाउस के पास ही रोक दिया. इसके साथ ही मंडी हाउस से सुप्रीम कोर्ट की ओर जाने वाले रास्ते पर भी आवाजाही सीमित कर दी गई.

इसी बीच राहुल गांधी की कानूनी टीम सुप्रीम कोर्ट पहुंची और व्यक्तिगत रूप से याचिका दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की. बाद में टीम ने खुद ही याचिका दाखिल कर दी. यह याचिका राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग के नाम से दायर की गई है.

बड़े विपक्षी नेताओं की हुई जुटान

इस विरोध कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत INDIA गठबंधन के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए. मार्च में विभिन्न विपक्षी दलों के सांसद और नेता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे.

सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ने के लिए नेताओं को बसों से ले जाया जा रहा था, लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही उनके वाहनों को रोक दिया. इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, नेहा बोरा और अन्य नेता पैदल ही आगे बढ़ने लगे. हालांकि मंडी हाउस पहुंचते ही पुलिस ने जुलूस को आगे जाने से रोक दिया. इसके बाद नेताओं ने वहीं रुककर चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए.

राहुल गांधी ने मार्च को बताया ‘शिवजी की बारात’

मार्च शुरू होने से पहले राहुल गांधी ने करीब 40 मिनट तक मीडिया से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह आंदोलन किसी राजनीतिक कार्यक्रम से ज्यादा “शिवजी की बारात” की तरह है, जिसमें कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से बातचीत हुई है, तो राहुल ने कहा कि उनके संदेश आते रहते हैं और संभव है कि वह यह प्रेस कॉन्फ्रेंस भी देख रहे हों. राहुल के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी.

CJI को पहले ही भेजा गया था पत्र

इस पूरे विरोध प्रदर्शन की तैयारी काफी पहले से चल रही थी. रविवार को विपक्षी सांसदों के एक समूह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात और ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था.

विपक्ष की कोशिश थी कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े अपने आरोपों और मांगों को सीधे न्यायपालिका के सामने रखा जाए. इसी रणनीति के तहत सुप्रीम कोर्ट मार्च आयोजित किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

विरोध मार्च और याचिका दाखिल करने की कोशिशों के बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई. अदालत ने कहा कि कोई भी वकील या व्यक्ति स्वयं रजिस्ट्री में जाकर याचिका और अन्य आवेदन जमा कर सकता है और इसके लिए किसी प्रकार की बाधा नहीं है.

हालांकि इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रवेश पास बनवाना जरूरी है. कोर्ट प्रशासन सीमित संख्या में पास जारी करता है और पूरी व्यवस्था उसकी निगरानी में होती है. सुप्रीम Court ने यह भी साफ किया कि किसी भी नागरिक को जनहित या व्यक्तिगत मामले में याचिका दायर करने का अधिकार है.

साथ ही अदालत ने यह संदेश भी दिया कि यदि कोई संगठन बड़ी संख्या में लोगों के साथ परिसर में प्रवेश की कोशिश करता है, तो बाहरी सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बल तैनात हैं. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट विरोध प्रदर्शन का मंच नहीं है.

विरोध में कौन-कौन नेता रहे शामिल?

INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, अरविंद सावंत, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए.

मार्च शुरू होने से पहले सभी नेता कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में एकत्र हुए. यहां से उन्होंने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध की रणनीति तैयार की और बाद में प्रदर्शन में हिस्सा लिया.

भूपिंदर हुड्डा ने सरकार पर साधा निशाना

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार जनता की आवाज दबाना चाहती है, लेकिन लोकतंत्र में लोगों की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता.

हुड्डा ने दावा किया कि विपक्ष की एकजुटता से सरकार असहज महसूस कर रही है और इसी वजह से विरोध को रोकने की कोशिशें की जा रही हैं.

CEC को देना चाहिए इस्तीफा- सचिन पायलट

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ तीखे आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि देशभर से कांग्रेस कार्यकर्ता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचे हैं और सभी की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट उनकी बात सुने.

पायलट का कहना था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसले अवैध और असंवैधानिक हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मुद्दों को विपक्ष “वोट चोरी” बता रहा है, उनके समर्थन में सबूत मौजूद हैं और इसी वजह से लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जरूरी हो गया है. उन्होंने मांग दोहराई कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ देना चाहिए.

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‘आंदोलन जारी रहेगा’

सचिन पायलट ने यह भी कहा कि विपक्ष शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से अपनी बात रखना चाहता है, लेकिन पुलिस बल प्रयोग कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं पर लाठियां चलाई जा रही हैं और नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है.

वहीं समाजवादी पार्टी सांसद आनंद भदौरिया ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है. उनके मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर यह अभियान आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि जब तक इस्तीफा नहीं होता और कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध खत्म नहीं होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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