भारतीय वायुसेना (IAF) अब विश्व की सबसे प्राचीन जीवित नगरी काशी के आसमान में राष्ट्र की रक्षा शक्ति और सामरिक पराक्रम का नया इतिहास रचने जा रही है. ब्रह्मपुत्र की वादियों के बाद इस वर्ष वायुसेना का बहुप्रतीक्षित एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगेज’ (Wings Over Ganges) मां गंगा के पावन तट पर आयोजित किया जा रहा है. 22, 24 और 25 अक्टूबर 2026 को नमो घाट से लेकर अस्सी घाट तक 84 घाटों के ऊपर भारतीय वायुसेना के आधुनिकतम लड़ाकू विमान अपनी गरज और अचूक संतुलन से दुनिया को भारत की आसमानी ताकत का अहसास कराएंगे.
बुधवार, 21 अक्टूबर को हुए शुरुआती ट्रायल के दौरान ही जब सुखोई और लड़ाकू हेलीकॉप्टरों ने गंगा की सतह से चंद फीट ऊपर उड़ान भरी, तो घाटों पर मौजूद हजारों श्रद्धालु और दर्शक गर्व से रोमांचित हो उठे.
100 विमानों का महा-बेड़ा: राफेल से लेकर तेजस का संगम
इस ऐतिहासिक एयर शो में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के कुल मिलाकर करीब 100 विमान शामिल हो रहे हैं:
52 फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स: इनमें 4.5 जेनरेशन का बहुउद्देश्यीय सुपरसोनिक फाइटर जेट राफेल (Rafale), लंबी दूरी तक मार करने वाला दोहरे इंजन वाला सुखोई-30 MKI, स्वदेशी तकनीक का गौरव एलसीए तेजस (LCA Tejas), मिराज-2000, मिग-29 और डीप-पेनेट्रेशन स्ट्राइक विमान जगुआर शामिल हैं.
सूर्यकिरण और सारंग टीम का रोमांच: भारतीय वायुसेना की विश्वप्रसिद्ध ‘सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम’ (SKAT) के 9 हॉक (Hawk Mk 132) जेट्स हवा में डायमंड फॉर्मेशन, बैरल रोल और आसमान में तिरंगे के रंगों का स्मोक-ट्रेल बनाकर भारत की सांस्कृतिक एकता का संदेश देंगे. वहीं ध्रुव हेलीकॉप्टरों से लैस एशिया की प्रसिद्ध ‘सारंग हेलीकॉप्टर टीम’ एक-दूसरे से चंद मीटर की दूरी पर हैरतअंगेज क्रॉस-ओवर करतब दिखाएगी.
भारी परिवहन और विंटेज विमान: विशालकाय सी-17 ग्लोबमास्टर, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, सी-295, एएन-32 के साथ-साथ ऐतिहासिक ‘डकोटा’ विमान भी आसमानी फॉर्मेशन का हिस्सा बनेंगे.

हवाई प्रदर्शन का समय और कार्यक्रम
वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के अनुसार, तीनों दिन दर्शकों को लगभग 2 घंटे 20 मिनट तक निरंतर हवाई रोमांच देखने को मिलेगा:
पहला सत्र: सुबह 11:40 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
दूसरा सत्र: दोपहर 1:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक
इस दौरान लड़ाकू विमान नमो घाट से उड़ान भरकर गंगा की धारा के समानांतर राजघाट, मणिकर्णिका, दशाश्वमेध होते हुए अस्सी घाट की ओर सुपरसोनिक गति से गुजरेंगे.

रोचक सामरिक तथ्य: काशी में एयर शो क्यों है खास?
वायुसेना द्वारा मध्य कमान (प्रयागराज) की हीरक जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित यह शो सिर्फ एक करतब नहीं, बल्कि जटिल जल-क्षेत्र और घनी आबादी के ऊपर बेहद कम ऊंचाई (Low-altitude flying) पर उड़ान भरने की भारतीय पायलटों की असाधारण निपुणता का जीवंत प्रमाण है. यह आयोजन यह संदेश देता है कि भारत की वायुसेना अपनी परंपराओं का सम्मान करते हुए आधुनिकतम युद्धक तकनीकों से देश के आकाश को पूरी तरह अभेद्य बनाए हुए है.
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