इजराइल में किसकी बनेगी सरकार?
Israel Election 2026: इजराइल में चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजनकोट, दोनों के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती है. चुनाव के शुरुआती नतीजों में किसी भी खेमे को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में अब सरकार गठन के लिए छोटे दलों और अरब पार्टियों का समर्थन अहम हो गया है. इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका की भी नजर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले नेतन्याहू का समर्थन किया था. अब सवाल यह है कि क्या इजराइल में दक्षिणपंथी दलों की सरकार बनेगी, विपक्ष कोई नया समीकरण तैयार करेगा या फिर देश को दोबारा चुनाव का सामना करना पड़ेगा.
बहुमत से दूर दोनों खेमे
इजराइल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए. शुरुआती मतगणना के अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को करीब 53 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि आइजनकोट के विपक्षी खेमे के खाते में लगभग 48 सीटें जाने का अनुमान है. अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों को करीब 19 सीटें मिलने का अनुमान है. ऐसे में इन दलों का समर्थन सरकार गठन की पूरी तस्वीर बदल सकता है. हालांकि, अभी मतगणना और राजनीतिक बातचीत के बीच अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है.
अरब पार्टियों की भूमिका अहम
इस चुनाव में अरब पार्टियों का प्रदर्शन चर्चा का बड़ा विषय बन गया है. उनके पास इतनी सीटें हो सकती हैं कि वे किसी एक खेमे को बहुमत तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाएं. लेकिन उनके समर्थन को लेकर इजराइल के राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं आइजनकोट ने संकेत दिया है कि वे अरब पार्टियों के साथ औपचारिक गठबंधन बनाने के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने यहूदी दलों के साथ सरकार बनाने की बात कही है. इससे उनके लिए बहुमत जुटाने का रास्ता और मुश्किल हो सकता है. दूसरी ओर, नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं और चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है. पुलिस ने भी अरब पार्टियों द्वारा चुनाव में धांधली किए जाने के दावों का समर्थन करने वाला कोई सबूत नहीं मिलने की बात कही है.
ट्रंप की नजर सरकार गठन पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही नेतन्याहू के समर्थन में बयान दे चुके हैं. अब यह देखना अहम होगा कि सरकार गठन की बातचीत में वॉशिंगटन कितनी भूमिका निभाता है. अमेरिका द्वारा किसी खास नतीजे को लेकर दबाव बनाने की खबरों पर भी चर्चा हो रही है, लेकिन वॉशिंगटन की वास्तविक रणनीति को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है.
इजराइल और अमेरिका के बीच सुरक्षा तथा ईरान को लेकर करीबी सहयोग रहा है. नेतन्याहू ने भी चुनाव के बाद मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने और ईरान से जुड़े खतरे का मुकाबला करने पर जोर दिया है. ऐसे में अगली सरकार की राजनीतिक दिशा का असर दोनों देशों के संबंधों पर भी पड़ सकता है.
क्या दोबारा चुनाव होंगे?
अगर कोई भी गठबंधन जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाता है, तो इजराइल में एक बार फिर चुनाव की नौबत आ सकती है. हालांकि, उससे पहले राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन और साझा सरकार को लेकर बातचीत होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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