Bharat Express DD Free Dish

न देवी, न देवता! इस मंदिर में सदियों से हो रही है कुत्ते की पूजा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

Unique Temple Rajasthan: भगवान के तो ढेरों मंदिर देखे होंगे, लेकिन राजस्थान के जालौर में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां इंसान एक वफादार कुत्ते के आगे अपना सिर झुकाते हैं. जानिए इस ‘कूतरा बावजी’ मंदिर का अजब-गजब रहस्य.

जालौर का अनोखा कुत्ता मंदिर (कूतरा बावजी)

AI IMAGE

Unique Temple Rajasthan: राजस्थान अपनी समृद्ध परंपराओं और अनूठे किस्सों के लिए जाना जाता है, लेकिन जालौर जिले के तिलोरा गांव में आस्था का एक ऐसा ‘अजब-गजब’ रूप देखने को मिलता है जो हर किसी को हैरान कर देता है. यहां किसी देवी-देवता की प्रतिमा नहीं, बल्कि एक वफादार कुत्ते की मूरत पूजी जाती है, जिसे लोग श्रद्धा से ‘कूतरा बावजी’ कहते हैं.

जालौर के तिलोरा गांव में स्थित ‘कूतरा बावजी’ मंदिर वफादारी और आस्था का अनोखा केंद्र है. अपने मालिक की जान आदमखोर सूअर से बचाते हुए एक कुत्ते ने अपनी जान दे दी थी. उसकी याद और सम्मान में बने इस मंदिर में आज भी लोग मन्नतें मांगते हैं और श्रद्धा से सिर झुकाते हैं.

जब आदमखोर सूअर के आतंक से थर्राया इलाका

कहानी सालों पुरानी है, जब तिलोरा गांव की वाचल नाड़ी के आसपास घना जंगल हुआ करता था. वहां एक आदमखोर जंगली सूअर का खौफ इस कदर था कि लोग शाम ढलते ही घरों में दुबक जाते थे. किसानों की फसलें तबाह हो रही थीं और इंसानों पर जानलेवा हमले आम बात हो चुके थे. इस खौफनाक मंजर को खत्म करने के लिए बाकरपुरा के ठाकुर खंगाल सिंह राठौड़ अपने शिकारी दल और एक जांबाज वफादार कुत्ते के साथ जंगल में उतरे.

मालिक की ढाल बना वफादार, दी जान की बाजी

शिकार के दौरान जंगली सूअर ने झाड़ियों में छिपकर अचानक ठाकुर खंगाल सिंह पर सीधा हमला बोल दिया. मौत को सामने देख शिकारी दल के हाथ-पांव फूल गए, लेकिन तभी ठाकुर का वफादार कुत्ता काल बनकर सूअर पर टूट पड़ा. कुत्ते ने सूअर को इस कदर उलझाए रखा कि ठाकुर को संभलने का मौका मिल गया और उन्होंने सूअर को ढेर कर दिया. हालांकि, इस भयानक खूनी लड़ाई में गंभीर रूप से जख्मी होकर उस बेजुबान वफादार ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.

भूल का पछतावा और ‘कूतरा बावजी’ का अवतरण

शुरुआत में तो लोगों ने इस घटना को एक सामान्य हादसा मानकर अनदेखा कर दिया, लेकिन कहा जाता है कि इसके बाद परिवार पर अचानक संकट के बादल मंडराने लगे. जब एक साधु से मार्गदर्शन लिया गया, तो उन्होंने उस वफादार जीव की आत्मा के सम्मान और उसकी निष्ठा को नमन करने की सलाह दी. इसके बाद जिस जगह कुत्ते ने अपनी अंतिम सांस ली थी, वहीं एक भव्य स्मारक और मंदिर बनवा दिया गया.

आज भी झुकता है इंसानों का सिर

आज यह जगह ‘कूतरा बावजी’ के मंदिर के नाम से पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है. ठाकुर परिवार से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण हर साल यहां आकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. लोग मानते हैं कि इस मंदिर में माथा टेकने से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं. बेजुबान की वफादारी की यह अनोखी कहानी आज भी इंसानियत और बेजुबान के अटूट रिश्ते की मिसाल पेश करती है.

यह भी पढ़ें-कटघरे में खड़े हुए देवी-देवता! जानिए कौन है वो ‘जज’ जो सुनाती है भगवान को भी सजा?

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read