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बिना साइलेंसर वाली गाड़ी का ‘प्रदूषण’ चालान! नागौर पुलिस की इस हरकत का वीडियो हुआ वायरल तो क्या बोले लोग?

राजस्थान के नागौर में ट्रैफिक पुलिस ने एक इलेक्ट्रिक कार का PUC न होने पर चालान काट दिया, जबकि EV को इससे छूट होती है. इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की ‘मशीन लॉजिक’ पर सवाल उठ रहे हैं और सिस्टम की समझ पर बहस छिड़ गई है…

Edited by Rohit Agrawal

Nagaur EV Challan: राजस्थान के नागौर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे या फिर सिस्टम की जानकारी पर सिर पकड़ लेंगे. यहां यातायात पुलिस ने एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) का इसलिए चालान काट दिया क्योंकि उसके पास PUC (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र) नहीं था. बता दें कि मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिसकर्मी ने नियम समझने के बजाय अपनी ‘मशीन’ की दलील देनी शुरू कर दी. अब इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है.

जानिए क्या है पूरा मामला?

दरअसल घटना के मुताबिक, जोधपुर का एक चालक अपनी इलेक्ट्रिक कार से नागौर आया था. चेकिंग के दौरान पुलिस ने उसे रोका और सारे दस्तावेज मांगे. चालक ने बीमा, आरसी और लाइसेंस दिखा दिए लेकिन जब पुलिस ने PUC मांगा तो चालक हैरान रह गया. उसने पुलिसकर्मी को समझाया कि साहब, ये बैटरी वाली गाड़ी है, इसमें साइलेंसर ही नहीं है तो धुआं कहां से निकलेगा? लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी अड़ गया. उसकी दलील थी कि उनके ऑनलाइन सिस्टम में दस्तावेज ‘अपडेट’ नहीं दिख रहे इसलिए चालान काटा जा रहा है. इसी बहसबाजी का वीडियो अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

क्या EV के लिए जरूरी है PUC?

मोटर वाहन नियमों की बात करें तो प्रदूषण जांच (PUC) केवल उन वाहनों के लिए अनिवार्य है जो इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल, डीजल या गैस पर चलते हैं और जिनसे उत्सर्जन (धुआं) निकलता है. इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह से ‘जीरो एमिशन’ होते हैं इसलिए उन्हें PUC सर्टिफिकेट की श्रेणी से बाहर रखा गया है.

यही नहीं नागौर पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर तैनात कई जवानों को नए दौर की तकनीक और उनसे जुड़े परिवहन नियमों की बुनियादी जानकारी तक नहीं है.

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सोशल मीडिया पर ट्रोल हुई पुलिस

बताते चलें कि इस घटना के वीडियो वायरल होने के बाद नेटिजन्स नागौर पुलिस को जमकर ट्रोल कर रहे हैं. कोई इसे अंधेर नगरी चौपट राजा बता रहा है तो कोई कह रहा है कि यह सिर्फ वसूली का एक बहाना है. यूजर्स का तर्क है कि जब सरकार खुद इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है, तब इस तरह की अज्ञानता भरे चालान जनता में गलत संदेश देते हैं. अब देखना यह है कि विभाग के उच्च अधिकारी इस गलत चालान को रद्द करते हैं या संबंधित पुलिसकर्मी को नियमों का पाठ पढ़ाते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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