विश्लेषण

नारों से नहीं आचरण से बचेगा सनातन हिंदू धर्म

जब से सोशल मीडिया घर-घर पहुँचा है सब ने अपने परिवारों और मित्रों के ह्वाट्सऐप ग्रुप बना लिए हैं। जिनमें पारिवारिक समाचार से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रात-दिन बहस चलती रहती है। हमारे परिवार के भी चार पीढ़ी के सदस्य, जो भारत सहित दुनिया के कई देशों में रहते हैं, ऐसे ग्रुप के सदस्य हैं। हमारे इस समूह में तीन ख़ेमे बटे हुए हैं; पहला जो मोदी जी के अंधभक्त हैं। दूसरा जो हिंदुत्व के घोर समर्थक हैं और तीसरा वो जो ईश्वर में तो आस्था रखते हैं परंतु हिंदू रीति रिवाजों या मंदिर जाने में उनकी श्रद्धा नहीं है।

आजकल टीवी मीडिया में रोज़ाना जिस तरह का धार्मिक उन्माद पैदा किया जाता है उसे देख कर प्रभावित हुए हमारे इस समूह में चौथी पीढ़ी के एक युवा ने पिछले दिनों एक पोस्ट डाली, जिसमें उसने लिखा कि, “हमें भी अपना सनातनी ईको-सिस्टम बनाना चाहिए।”उसकी यह पोस्ट मुझे बहुत रोचक लगी। मैंने पलट कर पूछा कि, सनातनी ईको-सिस्टम का क्या मतलब है? दर्जनों सवाल जवाबों के बावजूद ये युवा यह नहीं स्पष्ट कर सका कि इसका क्या मतलब है। तब मैंने उससे पूछा कि ईको-सिस्टम  को छोड़ो, तुम केवल यह बताओ कि सनातन से तुम्हारा क्या आशय है? हार कर उसने कहा कि जो मुसलमानों से लड़ने के लिए हम हिन्दुओं को संगठित करे वही सनातनी ईको-सिस्टम है। इस पर मैंने पूछा कि फिर सनातनी ईको-सिस्टम और हिंदुत्व में क्या अंतर है? उसका उत्तर था कि हिंदुत्व तो भाजपा का एजेंडा है और मैं भाजपा को दूसरे राजनैतिक दलों की तरह ही एक दल मानता हूँ। जिसका मात्र उद्देश्य सत्ता पाना है। उसने आगे कहा कि हम हिंदुओं को भाजपा के अलावा संगठित होने की ज़रूरत है।

ये नौजवान अच्छा ख़ासा पढ़ा लिखा, बुद्धिमान और कॉर्पोरेट जगत की प्रतिष्ठित नौकरी में है। जिससे एक सामान्य समझ की अपेक्षा कि जा सकती है। पर जो संवाद उससे हुआ उससे क्या सिद्ध होता है?  पाठक विचार करें कि हमारी युवा पीढ़ी आज कितनी थोथी और सतही बातों से प्रभावित होकर अनर्गल प्रलाप कर रही है। उनकी भावनाएँ भड़का कर राजनैतिक दल अपना भला भले ही कर लें पर समाज इससे गर्त में जा रहा है। ऐसा नहीं है कि हमारी पीढ़ी जब युवा थी तो हम सर्वज्ञ थे। सच्ची बात तो यह है कि हमारी पीढ़ी के ज्ञान के स्तर से आज की पीढ़ी के पास कई गुना ज़्यादा सूचनाओं का भंडार है। रही-सही कमी कल्पतरु की तरह गूगल देवता पूरी कर देते हैं। जो हर प्रश्न का क्षण भर में जवाब दे देते हैं। बावजूद इसके मुझे लगता है कि आज की युवा पीढ़ी और उनके जैसे उनके अभिभावक एक कल्पना लोक में जी रहे हैं। जहां न तो तथ्यों को जानने की जिज्ञासा है और न उसके लिये समय लगाने की इच्छा। पूरी पीढ़ी के इस आलस्य का परिणाम ये हो रहा है कि यह पीढ़ी निहित स्वार्थों के हितों को साधने के लिए मानसिक रूप से अविकसित या ग़ुलाम बनती जा रही है। ये एक गंभीर समस्या है।

हमारी सनातन संस्कृति का आधार चारों वेद, उपनिषद, ब्राह्मण, आरण्यक व पुराण हैं। ये वो साहित्य है जो हज़ारों साल से अक्षत है। जिसे प्रदूषित करने का या बदलने का दुस्साहस किसी ने आजतक नहीं किया। जिनको इस वैदिक साहित्य का विरोध करना था या नकारना था उन्होंने अपने नये रास्ते चुन लिए। पर जो अपने को सनातनी संस्कृति का ध्वजवाहक मानते हैं या आज की शब्दावली में स्वयं को हिंदू कहते हैं उनकी इस वैदिक साहित्य में अटूट श्रद्धा है। इसी श्रद्धा का परिणाम है कि हमारी सनातन संस्कृति आजतक जीवित है और जागृत है। सनातन का अर्थ ही यह है जो पहले भी था, आज भी है और कल भी रहेगा। चिंता की बात यह है कि हिंदुत्व की विचारधारा को दिशा देने वाले हमारे इन वैदिक शास्त्रों में विश्वास नहीं करते। वे तो शुरू से आजतक इनमें परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं। वृहत हिंदू समाज के लिए ये गंभीर चुनौती है कि वो अपनी आस्था पर टिका रहे या इस नये मायाजाल फँस कर अपनी जड़ों से कट जाये। तब हमारा सनातन हिंदू धर्म कैसे बचेगा?

जिस तरह इंजीनियरिंग, डाक्टरी, वकालत या किसी अन्य व्यवसाय की शिक्षा हमें कोई सड़क चलता नहीं दे सकता। ऐसी शिक्षा प्राप्त करने के लिए हमें उस विषय के कॉलेज में दाख़िला लेना पड़ेगा। इसी तरह धर्म का मामला है। कोई भी व्यक्ति केसरिया वस्त्र पहन कर या केसरिया झंडा उठा कर हमें धर्म की शिक्षा नहीं दे सकता। इस शिक्षा को प्राप्त करने के लिए हमें स्थापित संप्रदायों के आचार्यों की शरण लेनी होती है। उन्हीं के मार्ग-निर्देशन में हम अपने धर्म को जान पाते हैं। सनातन धर्म के आधार स्तंभ हैं चारों शंकराचार्य और विभिन्न संप्रदायों के वे आचार्य जो सदियों से व परंपरा से हमें आध्यात्मिक ज्ञान देते आये हैं। इनके अलावा जो कोई भी धर्म के विषय में हमें निर्देश देता है वो समाज को गड्ढे में गिराने का कम कर रहा है। क्योंकि वे इसके लिये शास्त्रों द्वारा न तो अधिकृत हैं और न ही उनमें हमें ज्ञान देने की योग्यता है। दुर्भाग्य से आज हिंदू समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग परंपरा से स्थापित चारों शंकराचार्य और विभिन्न अधिकृत संप्रदायों के आचार्यों की अवहेलना करके राजनैतिक या आर्थिक स्वार्थसिद्धि में लिप्त लोगों से निर्देशित हो रहा है। ऐसे तो सनातन धर्म बहुत शीघ्र ही रसातल में चला जाएगा।

इसी तरह सनातन धर्म की संस्कृति में हर व्यक्ति की दिनचर्या व जीवन के विभिन्न स्तरों पर वर्णाश्रम व्यवस्था के माध्यम से एक संविधान उपलब्ध है। जिसका पालन किए बिना सनातन हिंदू धर्म बच ही नहीं सकता। इस संविधान का दार्शनिक निचोड़ भगवत गीता में हैं। जिसे हर हिंदू किसी योग्य और स्व्यंसिद्ध गुरु से सीख कर आचरण में ला सकता है। हज़ारों सालों से चली आ रही इस सुदृढ़ व्यवस्था को दरकिनार कर आत्मघोषित गुरुओं या राजनैतिक लोगों से सनातन धर्म के विषय में दिशा-निर्देश लेने वाला अपने और अपने कुल का भारी अहित करेगा। आवश्यकता इस बात की है कि हर सनातनी हिंदू पहले तो ये जानने-समझने की कोशिश करे कि सनातन हिंदू धर्म के सिद्धांत क्या हैं? फिर ऐसे गुरु खोजे जो उसे सही ज्ञान दे सकें, तभी सनातन धर्म का अनुसरण हो पाएगा। बाक़ी सब बयानबाज़ी है उससे न तो हमारे परिवार का भला होगा, न समाज का और न राष्ट्र का।

-भारत एक्सप्रेस

 

विनीत नारायण, वरिष्ठ पत्रकार

Recent Posts

UP में मुस्लिम नेतृत्व की जंग: इमरान मसूद Vs इकरा हसन, पश्चिमी यूपी में सपा-कांग्रेस में खींचतान तेज

UP News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को…

4 minutes ago

‘नियम ताक पर रखकर बनाए अफसर!’ ओडिशा DGP लिस्ट में हेरफेर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एमिकस क्यूरी ने खोली पोल

Supreme Court Case: ओडिशा में डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.…

13 minutes ago

बलरामपुर: गणेश विसर्जन में डीजे के शोर के बीच छात्रा की मौत, तेज आवाज और सुरक्षा पर उठे सवाल

Student Death DJ Noise: बलरामपुर में गणेश विसर्जन यात्रा के दौरान डिवाइन पब्लिक स्कूल की…

34 minutes ago

बिहार में बजा चुनावी बिगुल: 8 सीटों के लिए शेड्यूल जारी; जानें कौन हैं PK के 5 उम्मीदवार?

Bihar MLC Election 2026: निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद की 4 स्नातक और 4…

43 minutes ago

महंगाई की मार में फंसे ‘गणपति बप्पा’! इंदौर में 100 साल पुरानी झिलमिल झांकियों की परंपरा पर छाया संकट

Indore News: इंदौर की पहचान बन चुकी 100 साल पुरानी झिलमिल झांकियों की ऐतिहासिक परंपरा…

58 minutes ago