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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


सज्जाद जहीर उर्दू साहित्य के प्रमुख लेखक, प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक और कम्युनिस्ट विचारक थे. रावलपिंडी षड्यंत्र कांड में जेल जाने के बाद वे भारत लौटे, जहां नेहरू की मदद से उन्हें भारतीय नागरिकता मिली. जानिए उनके जीवन और राजनीतिक सफर की पूरी कहानी.

काशी के अंतिम शासक डॉ. विभूति नारायण सिंह ऐसे राजा थे, जिन्होंने राजगद्दी से ज्यादा लोगों के दिलों पर राज किया. वे वेद-पुराणों के विद्वान, शिक्षा के समर्थक और काशी की धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं के सच्चे संरक्षक थे.

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया.

2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार ने डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक पकड़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की जीत से ट्रंप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

बलोचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो प्राकृतिक संसाधनों, विशाल पहाड़ों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्वादर बंदरगाह के लिए जाना जाता है. इसके बावजूद यहां के लोग दशकों से राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक हिस्सेदारी और अपनी अलग पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं. आखिर बलोचिस्तान में असंतोष की जड़ें कितनी गहरी हैं और क्यों यह इलाका पाकिस्तान के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है?

मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित करते हुए किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में कई योजनाओं पर जोर दिया है.

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी महोत्सव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए. इस मौके पर उन्होंने गायत्री मंत्र की महत्ता बताते हुए कहा कि आध्यात्मिक चेतना व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है.

3 नवंबर 1947 को बड़गाम की लड़ाई में महज 24 साल की उम्र में मेजर सोमनाथ शर्मा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए. जानिए भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता की बहादुरी, उनके बलिदान और उस ऐतिहासिक लड़ाई की पूरी कहानी, जिसने कश्मीर की रक्षा में अहम भूमिका निभाई.

3 नवंबर 1957 को सोवियत संघ ने स्पूतनिक-2 के जरिए लाईका नाम की एक कुतिया को अंतरिक्ष में भेजकर इतिहास रच दिया था. वह पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने वाली पहली जीवित प्राणी बनी.

1834 में 36 भारतीय मजदूरों ने 'एटलस' जहाज से मॉरीशस पहुंचकर गिरमिटिया प्रवास के एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत की थी. जानिए 2 नवंबर को मनाए जाने वाले अप्रवासी दिवस का इतिहास और भारतीय मजदूरों के योगदान की पूरी कहानी.