Bharat Express DD Free Dish

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


वाशिंगटन में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात में व्यापारिक युद्धविराम दो महीने के लिए बढ़ गया है. हालांकि, ताइवान और तकनीकी विवादों पर दोनों देशों के बीच मौलिक मतभेद बरकरार हैं.

Ishwar Chandra Vidyasagar Biography: ईश्वरचंद्र विद्यासागर भारत के महान समाज सुधारक, शिक्षाविद और दया के प्रतिमूर्ति थे. उन्होंने संघर्षों से 'विद्यासागर' की उपाधि हासिल की और विधवा पुनर्विवाह व नारी शिक्षा के लिए ऐतिहासिक बदलाव किए.

चुनाव आयोग की निष्पक्षता और भूमिका को लेकर जारी बहस के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन एक बार फिर चर्चा में हैं. 1990 से 1996 तक अपने कार्यकाल में शेषन ने चुनावी नियमों के सख्त पालन, बूथ कैप्चरिंग पर नियंत्रण और प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर दिया था.

14 साल की उम्र में रुख्माबाई ने उस शादी को मानने से इनकार कर दिया, जिसे उन्होंने अपनी मर्जी से चुना ही नहीं था. 19वीं सदी के भारत में उनका यह फैसला असाधारण था.

Sanjay Mishra Autobiography: अभिनेता संजय मिश्रा अब लेखक के रूप में अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं. पेंगुइन स्वदेश से प्रकाशित होने वाली उनकी आत्मकथा ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ में उनके जीवन....

ISRO History: विफलता की जिम्मेदारी खुद लेना और सफलता का श्रेय टीम को देना- जानिए डॉ. कलाम के गुरु प्रो. सतीश धवन की उस लीडरशिप शैली के बारे में जिसने इसरो को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया.

Hanuman Ansh Movie Success: ‘हनुमान अंश’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, बुंदेली संगीत और अध्यात्म का वह जीवंत संगम है जो दर्शक को उसकी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक आत्मसम्मान से जोड़ता है.

बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच एक ऐसी दुनिया भी बसती है, जिसे समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है. राधिका आयंगर की किताब बनारस का मसान डोम समुदाय के जीवन, संघर्ष, सपनों और सामाजिक भेदभाव की इसी अनदेखी दुनिया से पाठकों को रूबरू कराती है.

आज भारत की स्वतंत्रता संग्राम की महानायिका मैडम भीकाजी रुस्तम कामा की जयंती है. वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उन विरल महिलाओं में से थीं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज बुलंद की और 1907 में स्टटगार्ट में ऐतिहासिक रूप से वंदे मातरम ध्वज फहराकर विश्व को भारत की स्वतंत्रता की आकांक्षा से परिचित कराया.

दिल्ली के तीन मूर्ति हाइफ़ा चौक पर 108वें हाइफ़ा विजय दिवस के अवसर पर उन वीर भारतीय सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अपनी अदम्य वीरता का परिचय दिया था.