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Apple ने हारी बड़ी पेटेंट लड़ाई, मासिमो को ₹5,620 करोड़ से ज्यादा चुकाने का आदेश

टेक दिग्गज Apple को एक बड़ा झटका लगा है, कैलिफोर्निया की एक संघीय जूरी ने Apple को पेटेंट उल्लंघन का दोषी ठहराते हुए अमेरिकी हेल्थ-टेक कंपनी Masimo Corporation को ₹5,620 करोड़ से अधिक मुआवजा देने का आदेश दिया है.

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विश्व की जानी-मानी कंपनी एप्पल (Apple) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. कैलिफोर्निया में संघीय जूरी द्वारा पेटेंट मामले में दोषी पाए जाने के बाद से कंपनी की परेशानी और बढ़ गई है. यह मामला एप्पल वॉच की ब्लड-ऑक्सीजन रीडिंग से संबंधित है. जूरी ने अपने आदेश में एप्पल को 5,620 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश पारित किया है.

क्या है पूरा मामला?

एप्पल कंपनी पर पूरा मुकदमा एप्पल वॉच में लगे पल्स ऑक्सीमीटर फीचर से संबंधित है. मुकदमे का एक बड़ा हिस्सा “पेशेंट मॉनिटर” शब्द के अर्थ के इर्द-गिर्द घूमता रहा. मासिमो ने तर्क दिया कि एप्पल वॉच इस परिभाषा में फिट बैठती है क्योंकि यह संभावित रूप से महत्वपूर्ण चिकित्सा घटनाओं का पता लगा सकती है. उन्होंने उच्च हृदय गति सूचना सुविधा की ओर इशारा किया, जिसके बारे में उनका कहना है कि इसकी संवेदनशीलता 95 प्रतिशत है.

ऐप्पल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि “पेशेंट मॉनिटर” निरंतर निगरानी के लिए डिजाइन किए गए उपकरणों को संदर्भित करता है और तर्क दिया कि इसकी सूचनाएँ केवल तभी सक्रिय होती हैं जब उपयोगकर्ता कम से कम दस मिनट तक स्थिर रहता है.

मासिमो कॉर्पोरेशन एक अमेरिकी स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी है जो इरविन, कैलिफ़ोर्निया में स्थित है. हालाँकि मामला रक्त ऑक्सीजन सेंसर पर केंद्रित था, मैसिमो ने हृदय गति चेतावनी के उदाहरण का उपयोग जूरी को यह समझाने के लिए किया कि पेटेंट के तहत ऐप्पल वॉच को एक मरीज मॉनिटर के रूप में माना जाना चाहिए. जूरी द्वारा इस वर्गीकरण को स्वीकार करने के बाद, उल्लंघन का दावा सामने आया.

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जूरी ने क्यों माना Apple दोषी

जूरी ने मासिमो की दलीलों को स्वीकार किया और एप्पल वॉच को पेशेंट मॉनिटरिंग वर्ग में रखा. इसके बाद पेटेंट उल्लंघन साबित हो गया.

जूरी का फैसला

एप्पल चाहता था कि जुर्माना 25–50 करोड़ रुपये के बीच रखा जाए. वहीं दूसरी तरफ मासिमो कॉर्पोरेशन ने 5,300–6,300 करोड़ रुपये की मांग की. जूरी ने मासिमो के पक्ष में निर्णय दिया और एप्पल को 5,620 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान का आदेश दिया. एप्पल का कहना है कि पेटेंट पुरानी तकनीक पर आधारित है और वह फैसले के खिलाफ अपील करेगा.

-भारत एक्सप्रेस



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