Bank of Baroda tender controversy: कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म ऐज ए सर्विस (CPaaS) कंपनियों और रजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से अपील की है कि वह बैंक ऑफ बड़ौदा के ₹3,100 करोड़ के बल्क मैसेजिंग टेंडर में हस्तक्षेप करे. उनका कहना है कि इस टेंडर की शर्तें बहुत सीमित हैं और इससे कई योग्य कंपनियां बाहर हो रही हैं.
केवल टेलीकॉम कंपनियों को मौका
शिकायतों के अनुसार, टेंडर में हिस्सा लेने का अधिकार सिर्फ टेलीकॉम ऑपरेटरों को दिया गया है. इससे करीब 2,000 रजिस्टर्ड टेलीमार्केटिंग और CPaaS कंपनियां प्रक्रिया से बाहर हो रही हैं. हलांकि, उद्योग से जुड़े लोगों का दावा है कि यह नियम पारदर्शिता और समान अवसर के सिद्धांतों के खिलाफ है. उनका कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा कम होगी और सरकार को सही कीमत का फायदा नहीं मिल पाएगा.
कंपनियों की आपत्ति
गुरुग्राम की डोव सॉफ्ट ने कहा है कि ऐसी शर्तें नए खिलाड़ियों के लिए बाजार में प्रवेश मुश्किल बना रही हैं. वहीं गपशप ने भी मांग की है कि टेंडर को रद्द कर दोबारा ऐसे नियमों के साथ जारी किया जाए, जिसमें सभी योग्य कंपनियां भाग ले सकें.
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बैंक ऑफ बड़ौदा का पक्ष
बैंक ऑफ बड़ौदा का कहना है कि वह पहले से ही कई CPaaS और अन्य सेवा देने वाली कंपनियों के साथ काम कर रहा है. नए टेंडर का मकसद ज्यादा टेलीकॉम ऑपरेटरों को शामिल करना है, ताकि सेवाओं की क्षमता और गुणवत्ता बेहतर हो सके. बैंक ने यह भी बताया कि वह सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर रिवर्स ऑक्शन करेगा, जिससे सबसे कम और सबसे प्रतिस्पर्धी कीमत तय की जा सके.
-भारत एक्सप्रेस
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