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कैबिनेट ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं; आंध्र प्रदेश में 4-लेन बाडवेल-नेल्लोर राजमार्ग को दी मंजूरी

लगभग 3,399 करोड़ रुपये की लागत वाली दो रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के चार जिलों में मौजूदा भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 176 किलोमीटर की दूरी जोड़ेगी.

PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में दो मल्टीट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी. इसके अलावा आंध्र प्रदेश में 4-लेन बाडवेल-नेल्लोर राजमार्ग के निर्माण को भी मंजूरी दी गई. लगभग 3,399 करोड़ रुपये की लागत वाली दो रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के चार जिलों में मौजूदा भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 176 किलोमीटर की दूरी जोड़ेगी.

इनमें रतलाम-नागदा तीसरी और चौथी लाइन, वर्धा-बल्हारशाह चौथी लाइन शामिल हैं.

इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों और माल की तेज और निर्बाध आवाजाही के लिए लाइन क्षमता को बढ़ाना है. वे लगभग 19.74 लाख की संयुक्त आबादी वाले लगभग 784 गांवों के लिए कनेक्टिविटी में सुधार करेंगे. ये मार्ग कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, जिप्सम, फ्लाई ऐश, कंटेनर, कृषि उत्पाद और पेट्रोलियम जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं. क्षमता वृद्धि से प्रति वर्ष 18.40 मिलियन टन माल ढुलाई बढ़ने की उम्मीद है.

इन परियोजनाओं से तेल आयात में 20 करोड़ लीटर की कमी आने और कार्बन उत्सर्जन में 99 करोड़ किलोग्राम की कमी आने की उम्मीद है, जो 4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है. निर्माण से लगभग 74 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है.

आंध्र प्रदेश का 4-लेन वाला बाडवेल-नेल्लोर राजमार्ग

इसके अलावा, कैबिनेट ने डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल के तहत आंध्र प्रदेश में 108.134 किलोमीटर लंबे 4-लेन वाले बाडवेल-नेल्लोर राजमार्ग गलियारे के निर्माण के लिए 3,653.10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी. यह गलियारा विशाखापत्तनम-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु और चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारों पर महत्वपूर्ण नोड्स को जोड़ेगा और कृष्णापटनम बंदरगाह तक रणनीतिक पहुंच प्रदान करेगा.

नए राजमार्ग से कृष्णापटनम बंदरगाह तक की यात्रा की दूरी लगभग 34 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे यात्रा का समय लगभग एक घंटे कम हो जाएगा. इससे ईंधन की खपत कम होगी, वाहन परिचालन लागत कम होगी और कार्बन फुटप्रिंट में कमी आएगी.

इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार सृजित होने की आशा है, तथा आस-पास के क्षेत्र में और अधिक आर्थिक लाभ होने की आशा है.


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-भारत एक्सप्रेस



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