वस्तु एवं सेवा कर परिषद (GST Councils) की बैठक 3 सितंबर को होने जा रही है. इस बैठक में 31 अक्टूबर तक कॉम्पेनसेशन सेस समाप्त करने पर चर्चा की जा सकती है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जीएसटी कॉम्पेनसेशन सेस 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाला था.
हालांकि, सेस कलेक्शन को पहले ही समाप्त करने के लिए चर्चाएं शुरू हो गई हैं, क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान राज्यों को राजस्व की कमी की भरपाई के लिए, लिए गए ऋण पूरी तरह से चुकाने के करीब पहुंच रहे हैं.
यह पुनर्भुगतान 18 अक्टूबर के आसपास पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन सरकार सुचारू संचालन के लिए इसे अक्टूबर के अंत तक बढ़ा सकती है. सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि सेस संग्रह से लगभग 2,000-3,000 करोड़ रुपए का सरप्लस प्राप्त हो सकता है, जिसे केंद्र और राज्यों के बीच समान रूप से शेयर किया जाएगा.
31 मार्च, 2026 को खत्म होने वाली है सेस की अवधि
कानून में कॉम्पेनसेशन के लिए सेस को केवल पांच वर्षों के लिए अनिवार्य किया गया था, क्योंकि राज्यों को चिंता थी कि 2017 में जीएसटी लागू होने पर उन्हें कर राजस्व का नुकसान होगा. इसलिए राज्य के राजस्व में कमी की भरपाई के लिए कॉम्पेनसेशन सेस लगाया गया था. केंद्र ने राज्यों की ओर से 2.69 लाख करोड़ रुपए उधार लिए और वित्तीय प्रबंधन में सहायता के लिए उन्हें ऋण के रूप में प्रदान किए.
हालांकि, महामारी के दौरान लिए गए ऋणों के भुगतान हेतु, जब राजस्व में तेज गिरावट आई थी, इस सेस को जून 2022 से मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया था. वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 के अनुसार, ऋणों का भुगतान पूरा होने के बाद उपकर संग्रह बंद हो जाएगा.
वित्त मंत्रालय ने सभी वस्तुओं पर 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो जीएसटी दरों के लिए जीएसटी परिषद को अपना प्रस्ताव भेजा है, जो मौजूदा चार स्लैब संरचना का स्थान लेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के अनुसार, गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को कम करने के उद्देश्य से एक नियोजित जीएसटी सुधार के माध्यम से नागरिकों को इस दिवाली दोहरा बोनस मिलेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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