Auto Sector Growth: भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए वित्त वर्ष 2026 एक बड़ी राहत और रिकवरी लेकर आया है. ‘डेलॉयट इंडिया’ (Deloitte India) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में मांग के आधार पर शानदार सुधार देखने को मिला है. हालांकि, यह सुधार हर जगह एक जैसा नहीं था. इस बार ग्रामीण इलाकों की मांग थोड़ी सुस्त रही, लेकिन शहरी क्षेत्रों और ‘प्रीमियम गाड़ियों’ के प्रति ग्राहकों के बढ़ते क्रेज ने पूरे ऑटो मार्केट की किस्मत चमका दी.
Auto Sector में प्रीमियम गाड़ियों का दबदबा
इस रिकवरी में सबसे बड़ा ‘गेमचेंजर’ दोपहिया (Two-wheeler) वाहन साबित हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इनकी थोक बिक्री में साल-दर-साल 10.7 प्रतिशत और खुदरा (Retail) बिक्री में 13.4 प्रतिशत का बंपर उछाल दर्ज किया गया. प्रीमियम मोटरसाइकिल की मांग में 40.7% की भारी बढ़ोतरी देखी गई.
स्कूटर की बिक्री उछाल (Two-wheeler In Auto sector)
पैसेंजर व्हीकल (कारों) की बात करें तो, यहां पारंपरिक एंट्री-लेवल (सस्ती) गाड़ियों का आकर्षण कम हुआ है, जबकि मिड-साइज एंट्री और प्रीमियम गाड़ियों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है. ग्राहकों ने अपने बजट के अंदर बेहतर और शानदार फीचर्स वाले विकल्प चुने हैं.
कमर्शियल वाहन पर GST का फायदा
इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गतिविधियों में तेजी और पुराने वाहनों को बदलने की मांग के चलते ‘कमर्शियल व्हीकल’ (CV) सेक्टर ने भी उड़ान भरी है और इसमें 12.6 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई. इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 के दूसरे हिस्से में GST में बदलाव और कीमतों में कमी का सीधा फायदा ग्राहकों को मिला. 350cc से कम इंजन वाली दमदार मोटरसाइकिलें सस्ती हो गईं और उनकी कीमतें आम कम्यूटर बाइक्स के करीब आ गईं, जिससे इनकी बिक्री ने रफ्तार पकड़ ली.
केरल नंबर वन, महाराष्ट्र फिसला (Auto Srctor After India Europe FTA)
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बात करें तो इसे अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है, लेकिन लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण यह अभी भी पूरे देश में ‘असमान’ है. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री 21.8% बढ़ी, लेकिन कुल बाजार में EV की हिस्सेदारी सिर्फ 6.5 प्रतिशत तक ही सीमित रही. सबसे दिलचस्प आंकड़ा राज्यों का है.
केरल 14.1 फीसदी के साथ ईवी अपनाने में यह राज्य सबसे आगे रहा. कर्नाटक और ओडिशा में भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला. वहीं महाराष्ट्र 9.2 फीसदी बिक्री बढ़ने के बावजूद महाराष्ट्र में ईवी की हिस्सेदारी घटकर 9.2% रह गई, क्योंकि यहां पेट्रोल-डीजल (पारंपरिक इंजन) वाले वाहनों की मांग अचानक फिर से बढ़ गई.
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कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2026 में शहरी बाजारों के ‘प्रीमियम और नए फीचर्स’ के शौक ने ऑटो सेक्टर की ग्रोथ को संभाले रखा है. रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि आने वाले समय में ‘भारत-यूरोप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (Free Trade Agreement) और नई ‘ईवी नीतियां’ इस सेक्टर को ग्लोबल स्तर पर एक नई और अभूतपूर्व मजबूती दे सकती हैं.
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