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परिवर्तित-जीनोम वाली चावल की किस्में विकसित करने वाला भारत बना पहला देश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को जीनोम में परिवर्तन कर तैयार चावल की दो किस्मों के विकास की घोषणा की. यह उपलब्धि हासिल करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को जीनोम में परिवर्तन कर तैयार चावल की दो किस्मों के विकास की घोषणा की. यह उपलब्धि हासिल करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया. यह वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक नई शुरुआत है. इन नई फसलों के विकास से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी सकारात्मक परिणाम मिलेंगे. इससे सिंचाई के पानी की बचत होगी और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण पर दबाव कम होगा.

यहां एक कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, “विकसित राष्ट्र के लिए भारत का सपना साकार हो रहा है और किसान समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं. आज की उपलब्धि स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी.”

48,000 करोड़ रुपए के बासमती चावल का हुआ निर्यात

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, “ ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के दौरान, पीएम मोदी ने किसानों से कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने का आह्वान किया था. उनके शब्दों से प्रेरित होकर, आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के वैज्ञानिकों ने इन नई किस्मों के निर्माण के साथ कृषि के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं.”

शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, पौष्टिक उत्पादन बढ़ाने और भारत तथा दुनिया दोनों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की जरूरत है. साथ ही भारत को दुनिया की खाद्य टोकरी बनाने की भी जरूरत है. उन्होंने कहा, “हमें गर्व है कि हमारे प्रयासों से सालाना 48,000 करोड़ रुपए के बासमती चावल का निर्यात हुआ है.”

कृषि मंत्री ने बताया “माइनस 5 और प्लस 10” फॉर्मूला

कृषि मंत्री ने सोयाबीन, अरहर, तुअर, मसूर, उड़द, तिलहन और दलहन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए और कदम उठाने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने “माइनस 5 और प्लस 10” फॉर्मूला भी पेश किया, जिसमें बताया गया कि इसमें चावल की खेती के क्षेत्र को पांच मिलियन हेक्टेयर कम करने के बावजूद चावल का उत्पादन 10 मिलियन टन बढ़ाना शामिल है. इससे दलहन और तिलहन की खेती के लिए जगह खाली हो जाएगी.

उन्होंने किसानों, खासकर युवा किसानों से उन्नत खेती तकनीक अपनाने का आग्रह किया. चौहान ने कहा, “हमें कृषि अनुसंधान को किसानों तक ले जाने की जरूरत है. जब कृषि वैज्ञानिक और किसान मिलकर काम करेंगे, तो चमत्कार होगा.”


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-भारत एक्सप्रेस



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