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Donald Trump ने भारत पर कुल टैरिफ बढ़ाकर 50% किया, MEA का जवाब— ‘ये कदम अनुचित और अन्यायपूर्ण…’

Donald Trump ने अपना फायदा देखते हुए भारत पर 50% टैरिफ लगाया, रूस से भारत के तेल आयात को निशाना बनाया. एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 27 अगस्त से लागू होगा. भारत ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए राष्ट्रीय हित की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने की चेतावनी दी है.

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अमेरिका भारत के बीच 100 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है.

India’s Reply To Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आज भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया. यह आदेश 27 अगस्त से लागू होगा. ट्रम्प ने रूस से तेल आयात को इसके पीछे की वजह बताई, जिसमें भारत पर आरोप लगाया गया कि वह रूसी वॉर मशीन को ईंधन दे रहा है. मार्च 2022 में रूसी तेल आयात पर रोक लगाने के बाद अब ट्रम्प प्रशासन ने भारत के रूस से तेल खरीद को आर्थिक मदद के रूप में देखा.

‘भारत पर अतिरिक्त टैरिफ बहुत दुर्भाग्यपूर्ण’

भारत पर 50% टैरिफ लगाने के ट्रम्‍प के कदम को भारतीय विदेश मंत्रालय ने “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अविवेकपूर्ण” करार दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का तेल आयात बाजार-आधारित है और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है. बयान में यह भी जोड़ा गया कि कई अन्य देश भी अपने राष्ट्रीय हित में इसी तरह के कदम उठा रहे हैं, फिर भी अमेरिका ने भारत को निशाना बनाया.

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भारत-अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार

2024 के आंकड़ों के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार में भारत का आयात 3.46 लाख करोड़ रुपये और निर्यात 7.35 लाख करोड़ रुपये है. भारत से अमेरिका को होने वाले प्रमुख निर्यात में केमिकल, फार्मास्यूटिकल्स और हीरे-जवाहरात शामिल हैं. अब ट्रम्प के 50% टैरिफ से भारतीय निर्यातकों पर भारी असर पड़ सकता है, खासकर उन उत्पादों पर जो पहले से रास्ते में हैं, हालांकि अमेरिका की ओर से कुछ छूट की बात कही गई है.

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दोनों देशों के संबंधों में आएगा तनाव?

भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की चेतावनी दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों को मजबूत कर सकता है या वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख कर सकता है. यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है.

ट्रम्प का यह फैसला यूक्रेन संकट और रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच आया है. भारत ने पहले भी रूस से तेल खरीद को उचित ठहराया है, जो बाजार की कीमतों और ऊर्जा जरूरतों पर आधारित है. अमेरिका का यह कदम अन्य देशों के लिए भी एक संकेत हो सकता है.

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भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान आने के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद है. हालांकि, ट्रम्प के सख्त रुख और भारत की दृढ़ता से यह मुद्दा लंबे समय तक चर्चा में रह सकता है. भारत के लिए यह एक बड़ी आर्थिक और कूटनीतिक चुनौती है.

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