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सर्विस सेक्टर को मिला बूस्टर डोज, ग्रोथ 15 साल की सबसे तेज रफ्तार पर PMI 62.9 पर पहुंचा

India Economic Growth: भारत के सर्विस सेक्टर ने अगस्त में 15 साल की सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की. HSBC इंडिया सर्विसेज़ PMI बढ़कर 62.9 पर पहुंचा, विदेशी ऑर्डरों और मज़बूत मांग ने दी गति.

India Economic Growth

India Economic Growth: भारत का सर्विस सेक्टर अगस्त महीने में रफ्तार पकड़ता नजर आया है. मांग में तेज़ी और विदेशी ऑर्डरों की बढ़ोतरी के दम पर यह क्षेत्र पिछले 15 साल का सबसे तेज़ विस्तार दर्ज कर रहा है. HSBC इंडिया सर्विसेज़ परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI), जिसे एसएंडपी ग्लोबल तैयार करता है, अगस्त में बढ़कर 62.9 पर पहुंच गया. जुलाई में यह आंकड़ा 60.5 था.

गौरतलब है कि 50 से ऊपर का स्तर कारोबार में विस्तार और उससे नीचे का स्तर गिरावट को दर्शाता है. HSBC की चीफ इंडिया इकॉनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी ने कहा, ‘भारत का सर्विसेज़ PMI पिछले महीने पंद्रह साल की ऊँचाई पर पहुँच गया, जिसकी वजह है नए ऑर्डरों में तेज़ उछाल.’

विदेशी ऑर्डरों ने बढ़ाई रफ्तार

रिपोर्ट के अनुसार, नए बिज़नेस ऑर्डर लगातार 49वें महीने बढ़े और यह बढ़त बीते 15 सालों में सबसे मज़बूत रही. खास बात यह रही कि एक्सपोर्ट ऑर्डर्स भी तेज़ी से बढ़े, जो पिछले 14 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. एशिया, यूरोप, मिडिल ईस्ट और अमेरिका से आई मांग ने इसमें अहम योगदान दिया.

तेज़ मांग के चलते कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत ग्राहकों तक ज़्यादा आक्रामक ढंग से पहुँचाई. रिपोर्ट बताती है कि आउटपुट प्राइस इन्फ्लेशन जुलाई 2012 के बाद सबसे ऊपर गया, जबकि इनपुट कॉस्ट पिछले नौ महीनों में सबसे तेज़ी से बढ़ी.

विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह मज़दूरी में बढ़ोतरी, वेतन वृद्धि और ओवरटाइम पेमेंट रहे. कुल मिलाकर, जुलाई में जो महंगाई घटकर आठ साल के निचले स्तर 1.55% पर आई थी, अब उसके दोबारा चढ़ने के आसार बनते दिख रहे हैं.

कारोबारियों का आत्मविश्वास और मार्केटिंग पर खर्च

सर्वे में यह भी सामने आया कि कारोबारियों का आत्मविश्वास पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा है. कंपनियाँ विज्ञापन और मार्केटिंग पर ज़्यादा खर्च कर रही हैं और मांग को लेकर उत्साहित नज़र आ रही हैं. हालांकि, भर्ती की रफ्तार तेज़ी से नहीं बढ़ी. ज़्यादातर कंपनियाँ इस समय पार्ट-टाइम स्टाफ रखने को तरजीह दे रही हैं.

अगस्त में कम्पोज़िट PMI, जिसमें सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग दोनों शामिल होते हैं, 61.1 से बढ़कर 63.2 पर पहुँचा. यह पिछले 17 सालों का सबसे ऊँचा स्तर है. इससे साफ है कि अर्थव्यवस्था दोनों ही मोर्चों पर मजबूत रफ्तार पकड़ रही है. यह प्रदर्शन उस समय आया है जब आधिकारिक आंकड़े बता चुके हैं कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8% की दर से बढ़ी.

हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते व्यापारिक तनाव भारत की रफ्तार पर असर डाल सकते हैं. हाल ही में अमेरिका की ट्रंप सरकार ने भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगाया है. माना जा रहा है कि इसका असर आने वाले महीनों में भारतीय सेवाओं और वस्तुओं की मांग पर पड़ सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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