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IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी ने की भारत के छोटे परमाणु रिएक्टर कार्यक्रम की तारीफ

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने भारत की छोटे परमाणु रिएक्टर पहल की सराहना की है.

IAEA chief praises India

नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने भारत की छोटे परमाणु रिएक्टर पहल की सराहना की है. उन्होंने कहा कि भारत ने शुरुआती दौर में पश्चिमी स्रोतों से परमाणु तकनीक हासिल की थी, लेकिन बाद में स्वदेशी विकास पर ध्यान केंद्रित किया और “बहुत अच्छे रिएक्टर” बनाए, जिनमें से “20 बिना किसी रुकावट के कार्य कर रहे हैं.”

भारत की परमाणु ऊर्जा में बढ़ती क्षमता

ग्रोसी ने कहा कि वर्तमान में परमाणु ऊर्जा का भारत की कुल बिजली उत्पादन में योगदान बहुत कम है, लेकिन सरकार इसे 100 गीगावॉट तक ले जाने की महत्वाकांक्षी योजना बना रही है, जो कि पूरी तरह संभव है. उन्होंने कहा, “मैं भारत को एक ऐसा देश मानता हूं, जिसमें अपार आंतरिक संभावनाएं हैं. लेकिन इसके साथ ही, मेरा यह भी मानना है कि भारत वैश्विक स्तर पर भी अहम भूमिका निभा सकता है. परमाणु तकनीक का निर्यात किया जा रहा है, और इसमें भारत को भी सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए.”

उन्होंने भारत सरकार द्वारा हाल ही में छोटे परमाणु रिएक्टर खंड में उठाए गए कदमों की सराहना की. ग्रोसी ने कहा, “परमाणु ऊर्जा पूंजी-गहन होती है और सभी संसाधन सार्वजनिक क्षेत्र से नहीं आ सकते. भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए, सार्वजनिक-निजी भागीदारी या यहां तक कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के लिए निजी स्वामित्व का विकल्प भी तलाशा जाना चाहिए. मैं भारत की कानूनी और नीतिगत दृष्टिकोण में इस बदलाव को एक बड़ा और सही दिशा में बढ़ा हुआ कदम मानता हूं.”

ईरान का परमाणु कार्यक्रम और वैश्विक चिंताएं

ईरान की परमाणु स्थिति पर चर्चा करते हुए ग्रोसी ने कहा कि देश के पास वर्तमान में परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन वह लगभग हथियार-ग्रेड स्तर तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा है. उन्होंने कहा, “ईरान का परमाणु कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण, महत्वाकांक्षी और तकनीकी रूप से उन्नत है. उन्हें इस पर स्पष्ट जवाब देने होंगे.”

उन्होंने कहा कि हाल ही में बीजिंग में रूस, चीन और ईरान के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक सकारात्मक संकेत देती है. साथ ही, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता को भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही इस पत्र की सामग्री और प्रतिक्रिया विवादास्पद रही हो, लेकिन इससे संवाद की आवश्यकता का संकेत मिलता है.

ग्रोसी ने आगे कहा, “इस मुद्दे का समाधान संभव है, लेकिन समय सीमित है. हमें एक ऐसा परिणाम चाहिए जो सकारात्मक, कूटनीतिक और अहिंसक हो, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आवश्यक आश्वासन प्रदान करे. यह सभी के हित में है, और मैं यही बात अपने ईरानी समकक्षों से कहता हूँ.”

यूक्रेन संकट और ज़ापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र की सुरक्षा

यूक्रेन के मुद्दे पर ग्रोसी ने कहा कि देश की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है. उन्होंने विशेष रूप से ज़ापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा पर चिंता जताई, क्योंकि यह अग्रिम पंक्ति में स्थित है और अत्यधिक खतरे में है.

उन्होंने कहा, “यह संयंत्र पहले भी हमलों का निशाना बना है. कई बार बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो चुकी है. पिछले साल गर्मियों में, इसके एक कूलिंग टावर में आग लग गई थी. ऐसे में यह स्पष्ट है कि संयंत्र खतरे में है. IAEA की उपस्थिति ने जोखिमों को कम किया है, लेकिन उन्हें पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सका है.”

ग्रोसी ने यह भी कहा कि वे सभी की तरह बातचीत और शांति प्रक्रिया की उम्मीद करते हैं, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, प्राथमिकता परमाणु दुर्घटना को रोकने की होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे पर लगातार निगरानी रख रहे हैं और हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि कोई बड़ा हादसा न हो.”

-भारत एक्सप्रेस



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