भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ऐतिहासिक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US Trade Agreement) को सिरे चढ़ाने और आखिरी अड़चनों को दूर करने के लिए देश की राजधानी नई दिल्ली में आज से एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल दौर की बातचीत शुरू हो गई है.
अमेरिकी सरकार के वार्ताकारों की एक बड़ी टीम भारत पहुंच चुकी है, जो भारतीय अधिकारियों के साथ लगातार चार दिनों तक बंद कमरों में मैराथन बैठक करेगी. इस महा-मंथन का मुख्य एजेंडा इस साल 7 फरवरी को तय हुए फ्रेमवर्क के बचे हुए 1 प्रतिशत पेंच को सुलझाना और इसके कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देना है.
ब्रेंडन लिंच और दर्पण जैन आमने-सामने(India US trade agreement)
नई दिल्ली में हो रही इस निर्णायक बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच (Brendon Lynch) कर रहे हैं, जबकि भारतीय टीम की कमान वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन संभाल रहे हैं.
चार दिनों की इस बैठक के दौरान व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत एक-दूसरे के बाजारों तक आसान पहुंच (Market Access), गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने, कस्टम और आर्थिक सुरक्षा सहयोग जैसे बेहद जटिल मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. हाल ही में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया था कि डील का 99% काम पूरा हो चुका है, लेकिन बचा हुआ 1% सबसे नाजुक दौर में है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का क्या था फैसला?
दरअसल, फरवरी में जब इस समझौते की रूपरेखा बनी थी, तब अमेरिका भारतीय निर्यात पर शुल्क को 50% से घटाकर 18% करने और रूस से तेल खरीद से जुड़ी भारतीय वस्तुओं पर लगे 25% अतिरिक्त शुल्क को हटाने पर राजी हुआ था. लेकिन, 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पारस्परिक शुल्क व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ा फैसला सुना दिया.
इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से अगले 150 दिनों के लिए दुनिया के सभी देशों से आने वाले आयात पर एक समान (Uniform) 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया है. भारतीय वार्ताकार अब अमेरिकी टीम के सामने इसी नए टैक्स पेंच का तोड़ निकालने की कोशिश कर रहे हैं.
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कृषि और डेयरी सेक्टर पर भारत का कड़ा रुख
व्यापारिक रियायतों के बीच भारत ने अमेरिका को साफ संदेश दे दिया है कि वह अपने देश के करोड़ों किसानों और पशुपालकों के हितों की बलि नहीं चढ़ाएगा. भारत इस डील के तहत अपने संवेदनशील डेयरी और कृषि क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने को बिल्कुल तैयार नहीं है.
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में डेयरी, फल, सब्जियां, मसाले और अनाज को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है. भारत की रणनीति साफ है—घरेलू बाजार की सुरक्षा के साथ-साथ दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार (अमेरिका) में भारतीय सामानों के लिए तरजीही रास्ता साफ करना.
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-भारत एक्सप्रेस
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