India-US Trade Summit: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने एक विशेष समिट आयोजित किया. इस समिट में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने मौजूदा व्यापार, निवेश के सुधार और इसकी संभावनाओं पर चर्चा की. भारत-अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है, लेकिन कई चुनौतियाँ भी सामने हैं.
सम्मेलन में बताया गया कि टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएँ दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर रही हैं. कृषि, कपड़ा, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में 26% तक के टैरिफ लागत बढ़ा रहे हैं और अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं. इसके अलावा, जटिल नियामक मानक, आयात लाइसेंस और सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ जैसी गैर-टैरिफ बाधाएँ निर्यातकों के लिए बाज़ार तक पहुँच को कठिन बना रही हैं.
व्यापार निर्बाध रूप से बढ़ सके, इस पर दिया जोर
वक्ताओं ने जोर दिया कि इन बाधाओं को दूर करने की जरूरत है ताकि व्यापार निर्बाध रूप से बढ़ सके. हालांकि, चुनौतियों के बीच अवसर भी उभर रहे हैं. वैश्विक मांगों और बदलते बाज़ार रुझानों के साथ निर्यात के नए क्षेत्र सामने आ रहे हैं.

भारतीय उद्योगों को इन अवसरों को समझना होगा
PHD चैंबर के वक्ताओं ने कहा कि भारतीय उद्योगों को इन अवसरों को समझना होगा और अपनी रणनीतियाँ इसके अनुरूप ढालनी होंगी. एकजुट होकर भारत और अमेरिका एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं, जहाँ व्यापार बाधाओं से मुक्त और अवसरों से भरपूर हो. यह साझेदारी न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगी.
बिना भारत के अमेरिका ग्रेट नहीं बन सकता: संदीप
कार्यक्रम का संयोजन कर रहे संदीप अग्रवाल, सीनियर मैनेजिंग कमिटी मेंबर, PHDCCI, ने कहा, “बिना भारत के अमेरिका ग्रेट नहीं बन सकता. अमेरिका को भारत के साथ अलग रुख अपनाना होगा. 26% टैरिफ की बात कभी पूरी नहीं होगी.” उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को वैश्विक व्यापार के लिए अहम बताया. इस सम्मेलन ने दोनों देशों के बीच साझेदारी को नई दिशा देने की उम्मीद जगाई है.
- भारत एक्सप्रेस
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