भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सैन्य संसाधनों की तत्काल पूर्ति और मजबूती के लिए आपातकालीन खरीद अधिकारों का उपयोग करते हुए दो अहम सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं. ये सौदे कुल 295 करोड़ रुपये के हैं और इन्हें दो भारतीय निजी कंपनियों से किया गया है. इसके तहत सेना को निगरानी ड्रोन और छोटे ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ (कमीकाज़े ड्रोन) मिलेंगे.
पहला सौदा नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड से हुआ है, जिसके तहत सेना को लगभग 450 नग नागस्त्र-1आर लोइटरिंग म्यूनिशन मिलेंगे. यह सौदा 158 करोड़ रुपये का है. नागस्त्र-1आर ड्रोन रात में भी काम करने में सक्षम हैं और इनमें 360 डिग्री घूमने वाला कैमरा, साथ ही थर्मल कैमरे की सुविधा दी जा सकती है. यह ड्रोन लक्ष्य को सटीकता से भेदने की प्रणाली से लैस है.
295 करोड़ रुपये के दो अहम रक्षा सौदे
दूसरा समझौता 137 करोड़ रुपये का है, जो कि आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी के साथ किया गया है. इस अनुबंध के तहत सेना को ‘स्विच’ ड्रोन के वीटीओएल (वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग) संस्करण वाले हाइब्रिड मिनी यूएवी मिलेंगे. इनका इस्तेमाल खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही (ISR) अभियानों में किया जाएगा.
सेना की मौजूदा सूची में पहले से ही नागस्त्र ड्रोन और वीटीओएल क्षमता वाले यूएवी शामिल हैं. इन्हें हाल ही में 7 से 10 मई तक पाकिस्तान के साथ हुई सीमा पार झड़पों के दौरान प्रभावी रूप से इस्तेमाल भी किया गया था. नए सौदों के तहत सभी उपकरण एक वर्ष के भीतर आपूर्ति किए जाने हैं.
28 हथियार प्रणालियां आपात खरीद के लिए तैयार
इसके अतिरिक्त, DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने भी सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए 28 प्रकार के हथियार प्रणालियों की पेशकश की है, जिन्हें आपातकालीन स्थिति में खरीदा जा सकता है. इनमें रॉकेट, हवा से हवा में और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें, लेजर-निर्देशित बम, टॉरपीडो और कंधे पर दागे जाने वाले एयर डिफेंस मिसाइल शामिल हैं.
यह कदम न केवल देश की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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