Bharat Express DD Free Dish

भारतीय बासमती के आगे फेल हुआ पाकिस्तान, डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बीच क्यों अचानक बढ़ी डिमांड?

Indian Basmati In Global Market: भारत पर डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बाद भी बासमती चावल की मांग बढ़ी है. सबसे खास बात की इससे पाकिस्तान के आंख में आंसू आ गए हैं. आइये जाने इस साल के आंकड़े क्या कहते हैं?

Indian Basmati Demand In Global Market Despite Donad Trump Tariffs

विदेशी बाजारों से बाहर हुआ पाकिस्तान

Indian Basmati In Global Market: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बाद लोगों को लग रहा था कि भारत के निर्यात में कमी आएगी. ऐसा कुछ हद तक हुआ भी है. हालांकि, कुछ सेक्टर में बूम आ रहा है. वैश्विक व्यापार में भारत की साख दिनों-दिन मजबूत होती जा रही है. अमेरिकी टैरिफ जैसी चुनौतियों के बावजूद, भारतीय बासमती ने विदेशी बाजारों में अपना दबदबा कायम रखा है. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपियन खरीदारों ने कीमत और गुणवत्ता के कारण पाकिस्तान के मुकाबले भारतीय बासमती को ज्यादा प्राथमिकता दी है. इसका नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान का निर्यात प्रभावित हुआ और भारतीय किसानों को इसका सीधा लाभ मिला.

भारतीय बासमती चावल (Indian Basmati Demand) की मांग में इस साल इजाफा हुआ है, खासकर यूरोप में. इसकी बड़ी वजह कीमत रही, क्योंकि पाकिस्तानी बासमती भारतीय बासमती से 250 डॉलर प्रति टन महंगा रहा. एब्रो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर ग्राहम कार्टर ने बताया कि भारतीय बासमती की साख वैश्विक स्तर पर मजबूत है और यूरोपियन खरीदारों ने इसे प्राथमिकता दी.

भारतीय बासमती की मांग क्यों बढ़ी?

भारती के बासमती की मांग बढ़ने की कई वजहें हैं. पहली, इसकी कीमतें (Indian Basmati price) पाकिस्तानी बासमती के मुकाबले कम हैं. दूसरी, भारतीय बासमती की गुणवत्ता अच्छी है और इसकी लोकप्रियता वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है. एब्रो इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ने बताया कि कंपनी करीब 10-12 हजार किसानों से सीधे बासमती खरीदती है और उन्हें बेहतर खेती तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है.

ये भी पढ़ें: धूर्त ट्रंप की खुल गई पोल! पूर्व भारतीय राजदूत ने MAGA मैन के झूठ को किया बेनकाब, आंकड़ों के साथ दिखाया अमेरिका को आईना

पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ी

पाकिस्तान की तरफ से पिछले साल फसल कम हुई और कई व्यापारियों ने उम्मीद में ज्यादा दाम पर चावल रोक लिया. लेकिन कीमतें नहीं बढ़ीं और वे स्टॉक फंसा (Indian Basmati beats Pakistan) बैठे. पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2024-25 में 0.83 मिलियन टन बासमती का निर्यात किया, जिससे उसे करीब $795 मिलियन की आमदनी हुई.

अमेरिकी बाजार में चुनौती

ग्राहम कार्टर ने माना कि अमेरिका में हाल ही में लगाए गए 50% टैरिफ के कारण भारत के लिए वहां अवसर सीमित होंगे. हालांकि, एब्रो इंडिया अमेरिका, कनाडा, मध्य-पूर्व, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में सक्रिय है. एब्रो इंडिया ने भारत में चावल प्रोसेसिंग, सूजी और पास्ता उत्पादन के लिए बड़े निवेश किए हैं और घरेलू बाजार में ब्रांड विस्तार की योजना बना रही है. कंपनी ने हाल ही में 3 मिनट में पकने वाला पास्ता भी लॉन्च करने की तैयारी की है. इसके लिए कंपनी मध्य प्रदेश से ड्यूरम गेहूं और हरियाणा से सॉफ्ट ग्रेड गेहूं खरीदती है.

ये  भी पढ़ें: जिस पूर्व NSA के घर और दफ्तर पर ट्रंप ने कराई थी छापेमारी, अब उसने खोल दिए ट्रंप के एक-एक धागे, पढ़ें, जॉन बोल्टन ने क्या कहा?

बनी रही भारतीय बासमती की मांग

भारतीय बासमती चावल (Indian Basmati export Hike) की मांग में इजाफा हुआ है और इसकी साख वैश्विक स्तर पर मजबूत है. एब्रो इंडिया जैसी कंपनियां भारतीय बासमती को वैश्विक बाजार में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. हालांकि, अमेरिकी बाजार में टैरिफ के कारण चुनौतियां भी हैं. लेकिन भारतीय बासमती की मांग बढ़ने की उम्मीद है और इससे भारतीय किसानों को फायदा होगा. एक तरफ पाकिस्तान अपने किसानों से ज्यादा दाम पर चावल खरीदकर स्टॉक फंसाए बैठा रहा, वहीं भारत ने बेहतर कृषि तकनीकों और कम कीटनाशकों के उपयोग से अपनी साख को बढ़ाया. अमेरिकी टैरिफ जैसे झटके के बावजूद, भारतीय बासमती ने अपनी मांग बनाए रखी है.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read