परियोजना से जुड़े एक निवेशक ने शुक्रवार को रॉयटर्स को बताया कि सात भारतीय स्टार्टअप्स को एक अनूठे भारत-अमेरिका अंतरिक्ष और रक्षा सहयोग कार्यक्रम के लिए चुना गया है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए एक आशाजनक बाजार खुल गया है.
भाग लेने वाले स्टार्टअप और फोकस क्षेत्र
स्पेस इमेजिंग कंपनी कैलीडईओ, रॉकेट निर्माता ईथरियलएक्स और एआई-संचालित श्याम वीएनएल सहित स्टार्टअप रक्षा और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम में भाग लेंगे.
भारतीय निवेशक इंडसब्रिज वेंचर्स और अमेरिका स्थित फेडटेक द्वारा सितंबर 2024 में शुरू की गई यह पहल, चयनित कंपनियों को उपग्रह अवलोकन और उभरती हुई अंतरिक्ष और रक्षा प्रौद्योगिकियों का पता लगाने के लिए अमेरिकी रक्षा नवाचार इकाई, रक्षा विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों तक पहुंच प्रदान करेगी.
इंडसब्रिज वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर राहुल देवजानी ने कहा, “यह कार्यक्रम अमेरिका में उद्योग के नेताओं के साथ मूल्यवान संसाधन, मार्गदर्शन और आवश्यक संपर्क प्रदान करता है और हम रणनीतिक क्षेत्रों – रक्षा और दोहरे उपयोग वाली तकनीक – में दोनों देशों के बीच निजी क्षेत्र की साझेदारी में तेजी लाने के लिए इस पहल पर फेडटेक के साथ साझेदारी करने के लिए तत्पर हैं.”
भारत-अमेरिका स्टार्टअप्स शीर्ष अमेरिकी रक्षा फर्मों के साथ जुड़ेंगे
भारतीय स्टार्टअप्स को नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन, लॉकहीड मार्टिन और आरटीएक्स (पूर्व में रेथियॉन) जैसी प्रमुख अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ जुड़ने का मौका मिलेगा.
ये सहयोग उन्हें अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान कर सकते हैं, जिसका मूल्य सालाना लगभग 1.5 बिलियन डॉलर है.
स्टार्टअप्स से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र तक पहुंच – जो दुनिया में सबसे बड़ी है – से भारतीय कंपनियों के लिए संभावित रूप से 500 मिलियन डॉलर से 1 बिलियन डॉलर तक का वार्षिक राजस्व उत्पन्न हो सकता है.
यह कार्यक्रम अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग का हिस्सा है.
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इस महीने की शुरुआत में, भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके अमेरिकी समकक्ष जेक सुलिवन ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पर आगे सहयोग बढ़ाने तथा सैन्य समाधानों के लिए अत्याधुनिक वाणिज्यिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तेजी लाने पर चर्चा की थी.
कार्यक्रम और चयनित परियोजनाओं की विशिष्टताओं पर अभी भी चर्चा चल रही है, तथा आने वाले महीनों में अधिक विवरण सामने आने की संभावना है.
-भारत एक्सप्रेस
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