Bharat Express DD Free Dish

पिछले एक दशक में भारत की विकास में काफी तेजी से हुआ परिवर्तन, मोदी सरकार की नीतियों की वजह से हुआ फायदा

भारत ने पिछले एक दशक में विकास में तेजी से परिवर्तन किया है, जिसमें आयात पर निर्भरता कम हुई है और निर्यात में वृद्धि हुई है. मोदी सरकार की नीतियों और पहलों ने इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

India's Development
Prashant Rai Edited by Prashant Rai

इसमें कोई संदेह नहीं है कि पिछले एक दशक में भारत की विकास में काफी तेजी से परिवर्तन हुआ है. पहले देश विभिन्न क्षेत्रों में आयात पर अत्यधिक निर्भर हुआ करता था. इस छवि को सुधारते हुए भारत अब निर्यात में वर्ल्ड लीडर बन चुका है. भारत की किस्मत में यह बदलाव मोदी सरकार की नीतियों और पहलों की वजह से हो पाया है.

आज भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर और देश के भीतर भी मान्यता प्राप्त है. जिन उत्पादों पर पहले विदेशी ब्रांडों का दबदबा था, वे अब ‘भारत में निर्मित’ हो रहे हैं और दुनिया भर में निर्यात भी किए जाते हैं. चाहे फ्रेंच फ्राइज़ हो या कॉफ़ी, स्मार्टफोन हो या इलेक्ट्रिक कार, भारतीय उत्पाद आज किसी से पीछे नहीं हैं और वर्ल्ड स्टेज पर अपना स्टैंडर्ड स्थापित कर रहे हैं. मोदी सरकार की निरंतर कड़ी मेहनत और अद्वितीय दूरदर्शिता के माध्यम से भारत ने बहुत कम समय में खुद को विदेशी उत्पादों के अधीन, नासमझ उपभोक्ता से वैश्विक निर्माता और आपूर्तिकर्ता शक्ति में बदल दिया है.

खाद्य उत्पादों की मांग में वृद्धि

वैश्वीकरण के साथ, भारत में विदेशी खाद्य उत्पादों की मांग में काफी वृद्धि हुई. परिणामस्वरूप, 2000 के दशक के मध्य तक भारत का फ्रेंच फ्राइज़ आयात सालाना 5,000 टन से अधिक हो गया, जो 2010-11 (मार्च-अप्रैल) में 7,863 टन पर पहुंच गया. हालांकि, 2023-24 में, भारत ने ₹1,478.73 करोड़ मूल्य के 1,35,877 टन फ्रेंच फ्राइज़ का निर्यात किया, जो दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, जापान और ताइवान के बाजारों तक पहुंचा. भारत ने फ्रेंच फ्राइज़ के आयात पर अपनी निर्भरता को खत्म कर दिया और इसे निर्यात उत्पाद में बदल दिया. पिछले कुछ वर्षों में, भारत आलू उत्पाद का एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी उभरा है.

इसी तरह भारत के कॉफ़ी उद्योग ने पिछले 4 वर्षों में निर्यात में लगभग दोगुना वृद्धि की है. वित्तीय वर्ष 2023-24 में, कॉफ़ी निर्यात 2020-21 में $719.42 मिलियन से बढ़कर $1.29 बिलियन तक पहुंच गया, जिससे भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफ़ी उत्पादक बन गया. भारतीय कॉफ़ी अब दुनिया भर में पसंदीदा है और इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.

स्वदेशी रूप से बनाया जा रहा iPhone

एक और वैश्विक रूप से प्रतिष्ठित उत्पाद, Apple का iPhone अब भारत में स्वदेशी रूप से बनाया जा रहा है. 2024 में, Apple ने भारत से ₹1 लाख करोड़ से अधिक मूल्य के iPhone निर्यात किए. यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि Apple जैसी प्रमुख अमेरिकी कंपनी अब न केवल भारत में अपने उत्पाद बना रही है, बल्कि यहां से अन्य देशों को निर्यात भी कर रही है.

इसका श्रेय मोदी सरकार की पीएलआई योजना को जाता है. नतीजतन, भारत के आईफोन निर्यात का मूल्य सिर्फ़ एक साल में 42 प्रतिशत बढ़ गया, जो 2023 में 9 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 में 12.8 बिलियन डॉलर हो गया. आईफोन का घरेलू उत्पादन भी लगभग 46 प्रतिशत बढ़ा और विनिर्माण (मूल्य संवर्धन) में स्थानीय योगदान बढ़कर 15-20 प्रतिशत हो गया. यह भारत की विकास कहानी और इसके वैश्विक प्रभाव में किसी मील के पत्थर से कम नहीं है.

इसका श्रेय मोदी सरकार की पीएलआई योजना को जाता है. नतीजतन, भारत के आईफोन निर्यात का मूल्य सिर्फ़ एक साल में 42 प्रतिशत बढ़ गया, जो 2023 में 9 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 में 12.8 बिलियन डॉलर हो गया. आईफोन का घरेलू उत्पादन भी लगभग 46 प्रतिशत बढ़ा और विनिर्माण (मूल्य संवर्धन) में स्थानीय योगदान बढ़कर 15-20 प्रतिशत हो गया. यह भारत की विकास कहानी और इसके वैश्विक प्रभाव में किसी मील के पत्थर से कम नहीं है.

ऑटोमोबाइल उद्योग की सफलता

एक अन्य क्षेत्र जहां भारत ने समान प्रगति की है और धीरे-धीरे वर्ल्ड लीडर बन रहा है, वह है ईवी कारें. पहली बार, एक बहुराष्ट्रीय कार निर्माता सिट्रोएन ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ ईवी सिट्रोएन E-सी3’ का निर्यात शुरू किया है. अप्रैल 2024 में, इन ईवी का पहला बैच कामराजर पोर्ट से इंडोनेशिया भेज दिया गया था. जैसे Apple भारत में iPhone का उत्पादन करता है और इसे अन्य देशों में निर्यात करता है, वैसे ही सिट्रोएन जैसी एक फ्रांसीसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के लिए अपने मेड-इन-इंडिया ईवी के साथ ऐसा करना, उस बदलाव का प्रमाण है जो हम लगभग एक दशक में लाने में सक्षम हैं. भारत आज स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी है और सिट्रोएन की सफलता इसका एक और प्रमाण है. यह दर्शाता है कि भारत न केवल एक रणनीतिक बाजार है, बल्कि वाहनों, घटकों और गतिशीलता प्रौद्योगिकियों के लिए एक प्रमुख सोर्सिंग हब भी है.

भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग की सफलता की बात करें तो, मारुति सुजुकी की फ्रॉन्क्स एसयूवी का जापानी बाजार में हिट होना हमारी उन्नति का एक और बड़ा उदाहरण है. इसे मारुति सुजुकी इंडिया द्वारा जापान में लॉन्च की जाने वाली पहली एसयूवी बनाना, अगस्त 2024 में जापान को 1,600 से अधिक इकाइयों की इसकी पहली खेप भेजना हमारे आयात-निर्यात गतिशीलता में बदलाव के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था. एसयूवी को वर्तमान में दुनिया भर के 70 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर धूम मचाने वाला एक और भारत निर्मित उत्पाद बन गया है.


ये भी पढ़ें- वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में अंबुजा सीमेंट का मुनाफा 242% बढ़कर 1,758 करोड़ पहुंचा, कंपनी ने ओरिएंट सीमेंट में 26% हिस्सेदारी के लिए घोषणा की


-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read