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मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 का रीडेवलपमेंट: 60 साल पुरानी इमारत की जगह होगा अत्याधुनिक ‘गेटवे’, सालाना 2 करोड़ यात्रियों की क्षमता

छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (CSMIA) ने टर्मिनल 1 (T1) के पुनर्विकास की पहली कलात्मक झलकियां (Artistic Impressions) साझा की हैं. 60 साल पुरानी इमारत को हटाकर दिसंबर 2030 तक विश्वस्तरीय नया टर्मिनल तैयार किया जाएगा.

MUMBAI AIRPORT TERMINAL 1 REDEVELOPMENT VISION
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

मुंबई (28 अक्टूबर 2026): देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (CSMIA) ने अपने घरेलू टर्मिनल 1 (T1) के व्यापक पुनर्विकास की भव्य रूपरेखा पेश की है. एयरपोर्ट एयरलाइन ऑपरेटर्स कमेटी (AOC) की बैठक के दौरान टर्मिनल 1 के भविष्य की कलात्मक झलकियां (Artistic Impressions) साझा की गईं. यह नई डिजाइन मुंबई की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान, जैव विविधता और आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम होगी.

वर्ष 1964 में चालू हुआ मौजूदा टर्मिनल 1 अब अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुका है. स्ट्रक्टवेल (2017) और आईआईटी बॉम्बे (2024) द्वारा किए गए स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट में इस 60 वर्ष पुराने ढांचे में संरचनात्मक कमजोरियां और सुरक्षा जोखिम सामने आए थे, जिसके बाद जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पुरानी इमारत को बदलकर पूरी तरह नया टर्मिनल बनाना अनिवार्य हो गया है.

नए टर्मिनल की वास्तुकला: स्थानीय कला और हरियाली का संगम

साझा की गई डिजाइन के अनुसार, नया टर्मिनल मात्र एक इमारत नहीं बल्कि यात्रियों को एक अलौकिक अनुभव देने वाला केंद्र बनेगा:

डिपार्चर कर्बसाइड: प्रवेश द्वार को विशाल और भव्य रूप दिया गया है, जो यात्रियों को एक शानदार आगमन का अहसास कराएगा.

चेक-इन हॉल: यह एक खुला, स्तंभ-मुक्त (कॉलम-फ्री) और प्राकृतिक धूप से जगमगाता विशाल हॉल होगा, जिसमें मुंबई की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती स्थानीय कला कृतियां (म्यूराल्स) लगाई जाएंगी.

डिपार्चर होल्ड एरिया: इसे एक हरे-भरे ‘ओएसिस’ (नखलिस्तान) की तरह डिजाइन किया गया है, जिसमें इनडोर ग्रीनरी, प्रीमियम लाउंज और रनवे का विहंगम दृश्य दिखाने वाले बड़े ग्लास फसाड होंगे.

अराइवल कर्बसाइड: आगमन क्षेत्र में मुंबई की प्राकृतिक जैव विविधता का जश्न मनाता एक विशालकाय सिग्नेचर ‘फ्लेमिंगो स्कल्पचर’ (राजहंस की कलाकृति) यात्रियों का स्वागत करेगा.

क्षमता और तकनीकी दक्षता में भारी बढ़ोतरी

नए टर्मिनल के निर्माण से यात्रियों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी:

क्षमता में 33% का उछाल: वार्षिक यात्री क्षमता 15 मिलियन (1.5 करोड़) से 33% बढ़कर 20 मिलियन (2 करोड़) प्रति वर्ष हो जाएगी.

चेक-इन और सुरक्षा: चेक-इन काउंटरों की संख्या 74 से 47% बढ़ाकर 109 की जाएगी. सुरक्षा जांच लेनों को 2.5 गुना बढ़ाकर 15 पैसेंजर लेन और 5 ट्रांसफर लेन में बदला जाएगा.

रिमोट बोर्डिंग से मुक्ति: एयरोब्रिज से जुड़े कॉन्टैक्ट स्टैंड्स 7 से 3.5 गुना बढ़कर 25 हो जाएंगे, जबकि पारंपरिक बोर्डिंग गेटों की जगह 12 अत्याधुनिक ई-गेट्स (e-gates) लगाए जाएंगे.

तेज बैगेज डिलीवरी: बैगेज रिक्लेम बेल्ट की संख्या 5 से दोगुनी से अधिक होकर 11 हो जाएगी.

निर्माण और ट्रांजिशन रणनीति: उड़ानों पर नहीं पड़ेगा असर

मुंबई के यात्रियों को किसी भी असुविधा से बचाने के लिए पुनर्विकास कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा:

अप्रैल 2027: मौजूदा पुराने टर्मिनल 1 को गिराने (डिमोलिशन) का कार्य शुरू होगा.

मार्च 2029: अंतरिम घरेलू उड़ानों को संभालने के लिए टर्मिनल 2 (T2) का नया G+3 नॉर्थ-वेस्ट पियर विस्तार पूरी तरह चालू हो जाएगा.

दिसंबर 2030: नया और आधुनिक टर्मिनल 1 बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा. इसके साथ ही मुंबई एयरपोर्ट (CSMIA) की कुल वार्षिक यात्री क्षमता बढ़कर 65 मिलियन (6.5 करोड़) पहुंच जाएगी.

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