रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, भारत में यात्री वाहन (PV) बिक्री की मात्रा वित्त वर्ष 2026 (FY26) में 4-7% की मध्यम वृद्धि दर्ज कर सकती है, क्योंकि अधिकांश मांग कारक तटस्थ या अनुकूल बने हुए हैं. वहीं, दोपहिया (2W) वाहनों की बिक्री FY25 में अनुमानित 11-14% की वृद्धि के बाद FY26 में 6-9% की स्वस्थ दर से बढ़ने की उम्मीद है.
यात्री वाहन उद्योग की स्थिति
FY24 में भारत का यात्री वाहन उद्योग अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिसमें 4.2 मिलियन यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई. मौजूदा वित्त वर्ष (FY25) में अब तक की अवधि (YTD) में थोक बिक्री स्थिर रही, क्योंकि ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने उत्पादन बनाए रखा. हालांकि, उद्योग की बिक्री वृद्धि केवल 2% रही, जिसका कारण प्रतिस्थापन मांग (replacement demand) में गिरावट और उच्च इन्वेंट्री स्तर रहा. हालांकि, स्वस्थ खुदरा बिक्री (retail sales) के कारण पिछले कुछ महीनों में डीलरों की इन्वेंट्री होल्डिंग में कुछ कमी आई है, लेकिन यह अभी भी मध्यम स्तर पर बनी हुई है.
ICRA के अनुसार, “FY25 में उद्योग की वृद्धि 0-2% तक सीमित रहने की संभावना है. हालांकि, अधिकांश मांग कारक – जैसे कि डिस्पोजेबल इनकम, नए मॉडल लॉन्च, स्वामित्व लागत आदि – तटस्थ या अनुकूल हैं. ऐसे में, FY26 में PV उद्योग की वृद्धि 4-7% की मध्यम दर से होने का अनुमान है.”
दोपहिया वाहन उद्योग में सुधार जारी
ICRA ने बताया कि दोपहिया वाहन उद्योग ने वर्तमान वित्त वर्ष (FY25) में 10% की सालाना वृद्धि दर्ज की है. यह वृद्धि मुख्य रूप से FY2020-FY2022 के दौरान कम आधार स्तर से रिकवरी के कारण हुई है. पिछले कुछ महीनों में उद्योग को ग्रामीण मांग में सुधार से समर्थन मिला है, जिसे अच्छे मॉनसून से बल मिला. ICRA के अनुसार, “रबी फसल की अब तक की अच्छी बुआई को देखते हुए ग्रामीण मांग स्वस्थ रहने की उम्मीद है.”
इसके अलावा, आयकर दरों में बदलाव के कारण लोगों के पास अधिक डिस्पोजेबल इनकम उपलब्ध होगी, जिससे दोपहिया वाहनों की मांग को समर्थन मिलेगा. ICRA ने अनुमान लगाया कि “FY26 में दोपहिया उद्योग की बिक्री 6-9% की स्वस्थ दर से बढ़ सकती है, जो FY25 में अनुमानित 11-14% की वृद्धि के बाद होगी.”
वाणिज्यिक वाहन उद्योग में सीमित वृद्धि
घरेलू वाणिज्यिक वाहन (CV) उद्योग में FY26 में मामूली वृद्धि दर्ज होने की संभावना है. ICRA के अनुसार, “आर्थिक गतिविधियों में सुधार, बुनियादी ढांचे पर सरकार द्वारा किए जा रहे निवेश, मजबूत माल परिवहन उपलब्धता और स्क्रैपेज नीति जैसी नियामकीय पहलें प्रतिस्थापन मांग को बढ़ा सकती हैं.”
इसके अलावा, सरकार द्वारा पुराने वाहनों की अनिवार्य स्क्रैपिंग और प्रतिस्थापन मांग से बसों की बिक्री में वृद्धि हो सकती है. हालांकि, हल्के वाणिज्यिक वाहनों (LCV) की वृद्धि धीमी रहने की संभावना है, क्योंकि इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों (e3W) का बढ़ता चलन और ई-कॉमर्स क्षेत्र में सुस्ती इसके विकास को प्रभावित कर सकती है.
ICRA के अनुसार, FY26 में वाणिज्यिक वाहनों की अनुमानित वृद्धि दर इस प्रकार हो सकती है:
- मध्यम एवं भारी वाणिज्यिक वाहन (M&HCV – ट्रक): 0-3%
- हल्के वाणिज्यिक वाहन (LCV – ट्रक): 3-5%
- बसें: 8-10%
इस प्रकार, FY26 में भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग में यात्री और दोपहिया वाहनों की मध्यम वृद्धि जारी रहने की संभावना है, जबकि वाणिज्यिक वाहनों में सीमित वृद्धि देखी जा सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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