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जीएसटी 2.0 के ‘बचत उत्सव’: PM मोदी ने स्वदेशी से जोड़ा, क्या डोनाल्ड ट्रंप को जवाब है?

भारत ने जीएसटी 2.0 ने राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को बेहतर ढंग से एकीकृत करने और अंतर-राज्य व्यापार और व्यवसाय को आसान बनाने में मदद की है. इससे आगे भी देश के लिए उम्मीद नजर आ रही है.

PM Modi GST 2.0 Donald Trump Tariff

भारत ने जीएसटी 2.0 के साथ अप्रत्यक्ष कराधान के एक नए युग में प्रवेश किया है, जो पिछले शासन की तुलना में सरल और अधिक तर्कसंगत है. जीएसटी ने देश के विविध कराधान व्यवस्था में एकरूपता लाई और एक राष्ट्रीय कर ग्रिड को आकार देने में मदद की. इसने राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को बेहतर ढंग से एकीकृत करने और अंतर-राज्यीय व्यापार और व्यवसाय को आसान बनाने में मदद की है.

जीएसटी 2.0 के प्रमुख परिवर्तन

जीएसटी 2.0 के तहत, कर प्रणाली को दो मुख्य स्लैब में सरल बनाया गया है: 5% और 18%. आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर 5% का कर होगा, जबकि अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर 18% का कर लागू होगा. इसके अलावा, विलासिता और “पाप वस्तुओं” पर 40% का कर लगाया जाएगा.

ट्रंप टैरिफ के बीच फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नई व्यवस्था को ‘बचत का उत्सव’ कहा और इसे स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के विचार से जोड़ा. उनके विवरण ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक हैं जब देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और अन्य नीतिगत निर्णयों से उत्पन्न व्यवधानों से निपटने का प्रयास कर रहा है. प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि नए जीएसटी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा. इससे बचत में वृद्धि, मांग में वृद्धि, उपभोग में वृद्धि और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है.

क्या सस्ता होगा?

  • – दैनिक आवश्यकताएं: साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और अन्य घरेलू सामग्री अब सस्ती होंगी.
  • – इलेक्ट्रॉनिक्स: टीवी, एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन और डिशवॉशर जैसी वस्तुओं पर कर 28% से घटकर 18% हो गया है.
  • – ऑटोमोबाइल: छोटी कारें और दोपहिया वाहन अब सस्ते होंगे, जिससे ऑटोमोबाइल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा.
  • – स्वास्थ्य और जीवन बीमा: स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर अब कोई जीएसटी नहीं होगा, जिससे लोगों को आर्थिक सुरक्षा में मदद मिलेगी.
  • – खाद्य सामग्री: घी, पनीर, मक्खन और अन्य खाद्य सामग्री अब सस्ती होंगी.

जीएसटी 2.0 का उद्देश्य

जीएसटी 2.0 का उद्देश्य लोगों के हाथों में अधिक पैसा छोड़ना है, जिससे घरेलू खपत बढ़ेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जीएसटी 2.0 एक “बचत का त्योहार” है और यह स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के विचार से जुड़ा है. जीएसटी 2.0 भारत की कर प्रणाली में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है. यदि अनुमानित वृद्धि और खपत में वृद्धि होती है, तो सरकार को कर सुधार के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय नीतियों को लागू करना चाहिए. इससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के जीवन में सुधार होगा.

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इतिहास में एक नया अध्याय

जहां इस कदम ने विपक्ष को भाजपा पर निशाना साधने का मौका दिया है, वहीं यह निर्विवाद है कि नई जीएसटी व्यवस्था भारत के कराधान इतिहास में एक नया अध्याय है. यदि अनुमान सही साबित होते हैं और उपभोग में अपेक्षित वृद्धि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है, तो सरकार को अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय नीतियों के साथ इस कराधान सुधार को पूरा करना चाहिए.



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