MRP फॉर्मूले में हो सकता है बदलाव
Govt May Change MRP Formula: कहीं सेल तो कहीं महासेल. त्यौहारों का सीजन हो या मौसम का मिजाज बदल रहा हो. ऑनलाइन स्टोर से लेकर ऑफलाइन सभी स्थानों पर सेल का सैलाब आ जाता है. 10, 20, 50 परसेंट तक छूट तो बेहद आम है. हालांकि, कई बार ये छूट 80 से 90 परसेंट तक पहुंच जाती है. आदतन हम और आप इस पर कोई सवाल नहीं करते हैं. क्योंकि, हमें तो वहां अपना मुनाफा नजर आता है. हमारी से सोच वास्तविकता से काफी दूर है. असल में ये पूरा खेल MRP के मायाजाल में छुपा है. अब सरकार हमारी जेब कटने से रोकने के लिए सेल का खेल और MRP के मायाजाल से आजादी दिलाने का प्लान कर रही है.
फिलहाल देश में MRP तय करने का कोई खास फॉर्मूला नहीं है. इसे तय करने के पूरे राइट्स अभी सेलर और कंपनी के पास होते हैं. माना जा रहा है कुछ दिनों पहले सरकार ने इंडस्ट्री, कंज्यूमर और टैक्स से जुड़े प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई थी. इसी बैठक में MRP के ढांचे में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा गया है. हालांकि, इसे लेकर भी दो तरह की राय आने लगी है.
MRP के मायाजाल को समझें
देश में सबसे पहले MRP का फार्मूला साल 1990 में लाया गया था. इसका मकसद टैक्स की चोरी रोकना था. हालांकि, इसमें सरकार को कोई हस्तक्षेप नहीं होता. MRP किसी वस्तु का वह अधिकतम दाम होता है जो ग्राहक को चुकाना होता है. इसमें वह सभी कीमतें जुड़ी होती है जो प्रोडक्ट को ग्राहक तक पहुंचाने में लगती हैं. जैसे, मैनुफैक्चरर या सेलर लागत, सारे खर्च और अपना मुनाफा. MRP में ट्रांसपोर्ट चार्ज और टैक्स भी जुड़ा होता है.
इसमें क्या-क्या होता है?
- प्रोडक्ट की लागत
- मुनाफा
- माल ढुलाई का खर्चा
- कमीशन
- दुकानदार का मुनाफा
- विज्ञापन पर खर्च
- GST और अन्य टैक्स
सेल का खेल क्या है?
MRP के बाद अब आपको बताते हैं सेल का खेल क्या होता है. उदाहरण के लिए मान लीजिए बारिश का मौसम है तो अब छाता आदि में भारी छूट देकर ग्राहकों को आकर्षित किया जाता है. ऐसे में होता ये है कि कंपनियां या सेलर प्रोडक्ट का मैक्सिमम रिटेल प्राइज बढ़ा देता है और उसमें भारी छूट दे देता है. एक उदाहरण से समझिए. मान लीजिए आप कोई सामान खरीदने जा रहे हैं जिसमें MRP 1000 रुपये है. इसमें सेलर आपको 75 परसेंट का डिस्काउंट देकर 250 रुपये में बेच रहा है. इसके बाद भी उसकी दुकान चमक रही है.
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मतलब साफ है कि कही तो झोल है. अगर उसे मुनाफा हो रहा है तो टैक पर 1000 रुपये की कीमत क्यों लिखी गई है? असल में ये एक चाल है जिससे ग्राहक को अपना फायदा नजर आए. वास्तव में बाजार में मांग को देखकर उसके दाम बढ़ा दिए जाते हैं और उसे छूट पर बेचा जाता है. हालांकि, आउट सीजन या सीजन एंड सेल में कई बार सेलर और कंपनियां स्टॉक क्लियर करने के लिए वास्तव में सस्ता सामान देते हैं.
कैसे होगा आपको मुनाफा?
अब सरकार इस MRP के जरिए चल रहे सेल के खेल को रेगुलेट करने की की तारीका खोज रही है. इससे ग्राहकों के साथ कोई धोखा कम होगा या फिर नहीं होगा. साथ ही साथ बाजार में सामान सही कीमत पर बिकने लगेंगे. कोई भी कंपनी या सेलर मनमाने दाम तय नहीं कर पाएगा. इससे ग्राहक की जेब में बोझ कम होगा. अब सरकार चाहती है कि इस सिस्टम में पारदर्शिता लाया जाए. हालांकि, इस फैसले को लेकर भी बाजार में दो तरह की राय है. कई लोग इसे ग्राहकों के फायदे से जोड़कर देख रहे हैं. वहीं कई लोगों का कहना है कि इससे बहुत से प्रोडक्ट खत्म हो जाएंगे. अब देखना होगा कि सरकार क्या फैसला लेती है और इसका क्या असर होता है?
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