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अगस्ता वेस्टलैंड की कड़वाहट भूल 16 बिलियन डॉलर के पार भारत-इटली व्यापार, जानें पीएम मोदी के दौरे के मायने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली दौरे ने भारत-इटली संबंधों को नई रणनीतिक दिशा दे दी है. अगस्ता वेस्टलैंड विवाद के बाद अब दोनों देश AI, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और रक्षा उत्पादन में बड़े साझेदार बनने जा रहे हैं…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की यूरोप यात्रा के आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण चरण में इटली पहुंचे हैं. बता दें कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के विशेष निमंत्रण पर हो रहा यह दौरा दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक इतिहास में एक नया मील का पत्थर (India Italy Trade Deal) साबित होने जा रहा है.

दरअसल 2010 के दशक में ‘अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले’ और ‘इतालवी मरीन विवाद’ के कारण दोनों देशों के बीच जो भरोसा पूरी तरह टूट चुका था, उसे मेलोनी और मोदी की केमिस्ट्री ने न सिर्फ बहाल किया है, बल्कि ‘संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029’ के तहत बिजनेस का एक नया ग्लोबल कॉरिडोर तैयार कर दिया है.

अगस्ता वेस्टलैंड का वो काला दौर…

बता दें कि साल 2010 के दशक में वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में हुए भ्रष्टाचार ने भारत-इटली संबंधों को आईसीयू में पहुंचा दिया था. भारत ने इटली की रक्षा कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे व्यापारिक बातचीत ठप हो गई थी. लेकिन साल 2026 में भू-राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है.

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) संकट और ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के बीच, इटली अब भारत के लिए यूरोप का सबसे भरोसेमंद आर्थिक पार्टनर बनकर उभरा है. साल 2025 तक दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 16.77 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है.

पीएम मोदी के दौरे के मायने क्या?(India Italy Trade Deal)

पीएम मोदी के इस दौरे का सबसे बड़ा आर्थिक एजेंडा अगले 5 सालों (2025-2029) के लिए व्यापार और निवेश का रोडमैप तैयार करना है. ज्ञात रहे अपनी इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मट्टारेला और पीएम मेलोनी के साथ हाई-लेवल बिजनेस मीटिंग्स करेंगे.

इसमें दोनों देशों की टॉप कंपनियों के सीईओ (CEOs) भी शामिल हो रहे हैं. फोकस इस बात पर है कि साल 2000 से 2025 के बीच भारत को इटली से जो 3.66 बिलियन डॉलर का एफडीआई (FDI) मिला है, उसे अगले तीन साल में दोगुना कैसे किया जाए.

अब रक्षा ही नहीं, सेमीकंडक्टर और एआई पर दांव

बताते चलें यह दौरा भारत के लिए ‘तकनीक हस्तांतरण’ (Technology Transfer) के लिहाज से जैकपॉट साबित हो सकता है. अब बातचीत सिर्फ पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं है. भारत और इटली मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर चिप्स, एयरोस्पेस, और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे अत्याधुनिक सेक्टर्स में संयुक्त निवेश करने जा रहे हैं.

इसके अलावा, रक्षा के क्षेत्र में केवल हथियार खरीदने के बजाय ‘संयुक्त रक्षा उत्पादन’ (Joint Defense Production) पर सहमति बनी है, जो भारत के ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को ग्लोबल बूस्ट देगा.

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चीन के ‘BRI’ को यूरोप में मात देने की तैयारी

इस रणनीतिक वार्ता (India Italy Trade Deal) का सबसे कूटनीतिक पहलू ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) है. इटली इस कॉरिडोर का एक प्रमुख यूरोपीय टर्मिनल है. चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से इटली के बाहर निकलने के बाद, भारत और इटली मिलकर इस नए व्यापारिक मार्ग को तेजी से पूरा करना चाहते हैं.

इसके साथ ही, इटली भारत के इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) में भी भारी निवेश कर रहा है. भारत की मल्टी-अलाइन्मेंट नीति के तहत यूरोप का यह पावरहाउस अब भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नई ढाल बन रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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