Hormuz Strait Tanker Explosion: वैश्विक ऊर्जा की लाइफलाइन कहे जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में शनिवार को एक विस्फोट हुआ. इसने पूरी दुनिया के बाजारों को हिलाकर रख दिया है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के मुताबिक, एक विशाल तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंग से टकरा गया, जिससे उसके इंजन रूम में जोरदार धमाका हुआ और पूरा जहाज धधक उठा. इस एक अकेले टैंकर में 20 लाख बैरल (2 मिलियन) से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ था, जो समंदर में जलकर स्वाहा हो गया.
अगर यह तेल भारत आ रहा होता तो क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह देश का कितना बड़ा नुकसान होता? आइये आंकड़ों से समझते हैं कि इतने तेल से क्या-क्या हो सकता था?
पहले जानें 2 लाख बैरल का गणित?
20 लाख बैरल तेल लगभग 31 करोड़ 80 लाख लीटर (318,000,000 लीटर) होता है. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की औसत कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल मान ली जाए तो यह तेल करीब 15 करोड़ डॉलर होता. जब इस 20 लाख बैरल कच्चे तेल को फैक्ट्रियोंमें साफ किया जाता तो इससे 13 से 15 करोड़ लीटर पेट्रोल, 8 से 10 करोड़ लीटर डीजल, 3 से 4 करोड़ लीटर जेट फ्यूल मिलता. इसके साथ ही LPG रसोई गैस, तारकोल और प्लास्टिक जो मिलता वो अलग ही मिलता.
ये भी पढ़ें: बालासाहेब के बात कर उद्धव पर बरसे फडणवीस, दिखाया ऐसा आइना की मची उथल-पुथल
अब समझें भारत के लिए उपयोग (Hormuz Strait Crude Oil Loss Compared To India)
समंदर में बर्बाद हुआ 20 लाख बैरल कच्चा तेल यानी लगभग 31 करोड़ 80 लाख लीटर ईंधन होता है. इस नुकसान की भयावहता कितनी डरावनी है, इसे अगर हम भारत और उसके बड़े शहरों के रोजमर्रा के जीवन से जोड़कर देखें, तो यह एक धमाका पूरे हिंदुस्तान को थामने की ताकत रखता है.
10 घंटे थम जाता पूरा भारत
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है. हमारे देश में हर दिन लगभग 50 लाख बैरल तेल की खपत होती है. इस लिहाज से समंदर में जला तेल पूरे भारत को लगातार 10 घंटे तक ऊर्जा (बिजली, ट्रांसपोर्ट, फैक्ट्री) देने के लिए काफी था.
15 लाख कारें और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे
इस कच्चे तेल से जो पेट्रोल (करीब 14 करोड़ लीटर) रिफाइन होता, उससे एक औसत माइलेज वाली पेट्रोल कार दिल्ली से मुंबई के 15 लाख चक्कर लगा सकती थी. यानी देश की लाखों कारों का महीनों का ईंधन एक पल में राख हो गया.
18,000 भारतीय रेल इंजनों के टैंक फुल
भारतीय रेलवे के सबसे भारी-भरकम डीजल इंजनों (WDM-3D) की टैंक क्षमता 5,000 लीटर होती है. इस बर्बाद हुए तेल के डीजल से भारतीय रेलवे के 18,000 से अधिक बड़े रेल इंजनों को पूरी तरह फुल किया जा सकता था.
लाखों घरों की रसोई हो जाती गुल
रिफाइनिंग के दौरान इस तेल से जो एलपीजी (LPG) निकलती, उससे भारत के लगभग 5 लाख परिवारों के घरों में 14.2 किलोग्राम वाला रसोई गैस सिलेंडर एक पूरे महीने के लिए मुफ्त जल सकता था.
विमानों की 170 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें खाक
इससे निकलने वाले जेट फ्यूल (ATF) से बोइंग 777 जैसे दुनिया के सबसे बड़े हवाई जहाज दिल्ली के IGI एयरपोर्ट से न्यू यॉर्क (JFK) के बीच 170 बार सीधी उड़ान भर सकते थे.
महानगरों का ट्रांसपोर्ट
इस मलबे में तब्दील हुए तेल से दिल्ली की सभी DTC डीजल बसें डेढ़ साल (18 महीने) और मुंबई की BEST बसें पूरे 2 साल तक बिना रुके दौड़ सकती थीं.
क्यों सुलग रहा है होर्मुज का रास्ता? (Strait of Hormuz oil tanker explosion)
अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने 28 फरवरी से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी सैन्य पकड़ बेहद मजबूत कर दी है. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका या इजरायल से जुड़े किसी भी जहाज को सुरक्षित रास्ता नहीं देगा. चूंकि दुनिया का 20 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां जहाजों पर हो रहे बारूदी सुरंग और रॉकेट हमले आने वाले दिनों में ग्लोबल फ्यूल सप्लाई चेन को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं, जिसका सीधा असर आपकी जेब पर पेट्रोल-डीजल की महंगाई के रूप में दिख सकता है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




