Yes Bank-DHFL Loan Fraudster: यस बैंक-डीएचएफएल ऋण घोटाले के मुख्य आरोपी अविनाश भोसले पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. खबरों के अनुसार, भोसले ने हिरासत में रहते हुए लंदन में स्थित एक लग्जरी होटल को 1,432 करोड़ रुपये में बेच दिया, जिसे कथित तौर पर काले-धंधे के धन से खरीदा गया था.
यह सौदा मई 2022 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उसकी गिरफ्तारी के महज दो महीने बाद हुआ, जब अविनाश भोसले न्यायिक हिरासत में था. यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई उक्त घोटाले की जांच कर रही हैं, जिसके तहत भोसले पर 4,733 करोड़ रुपये के कर्ज की धोखाधड़ी का आरोप है.
हिरासत में रहते हुए कैसे किया सौदा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोसले ने फ्लोरा डेवलपमेंट लिमिटेड के जरिए 2018 में लंदन में होटल और वाणिज्यिक संपत्ति खरीदी थी, जो उसकी कथित कंपनी एबीआईएल ग्रुप से जुड़ी थी. इस संपत्ति को लंदन होटल होल्डिंग लिमिटेड को बेचा गया, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि हिरासत में रहते हुए यह सौदा कैसे संभव हुआ.
ईडी ने भोसले और उसकी कंपनियों की 164 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को कुर्क किया है, फिर भी इस बिक्री की जानकारी जांच एजेंसियों से छिपी रही, जिससे उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
जांच एजेंसियों को जुटाने होंगे दोबारा सबूत
इस घटना ने सीबीआई और ईडी की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि हिरासत में रहते वित्तीय लेन-देन संभव होना सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में बड़ी चूक को दर्शाता है. भोसले पर आरोप है कि उसने यस बैंक से डीएचएफएल को ऋण दिलाने के बदले करोड़ों रुपये की किकबैक ली थी, जो इस घोटाले का हिस्सा थी. अब इस नए खुलासे के बाद जांच एजेंसियों को दोबारा सबूत जुटाने और भोसले के नेटवर्क की गहराई तक जाने की जरूरत है.
तेजी से जांच जरूरी, भविष्य की कार्रवाई पर निगाहें
वर्तमान में भोसले न्यायिक हिरासत में है, और उसकी गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई लंबित है. इस मामले में ईडी और सीबीआई ने कड़ी कार्रवाई की बात कही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और तेजी से जांच जरूरी है. यह घटना भारतीय वित्तीय और न्यायिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है.
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