कान फिल्म फेस्टिवल 2023

‘किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’- अमेरिका के महाशक्ति बनने की कहानी

हॉलीवुड के दिग्गज फिल्मकार मार्टिन स्कारसेसे की नई फिल्म किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’ महाकाव्यात्मक अंदाज और सिनेमा की वेस्टर्न शैली में महाशक्ति के रूप में अमेरिका के खूनी इतिहास को दोबारा देखने समझने की कोशिश है। राबी राबर्टसन का संगीत पटकथा की करूणा को बहुत ऊंचाई पर ले जाता है तो रोड्रिगो पिएत्रो की सिनेमैटोग्राफी दृश्यों को एपिक जैसा बनाती है। एरिक रोथ के साथ फिल्म की पटकथा मार्टिन स्कारसेसे ने खुद लिखी है जो कई बार चकित करती है। लियोनार्दो डीकैप्रियो, राबर्ट डी नीरो और लिली ग्लैडस्टोन के जबरदस्त अभिनय से सजी यह फिल्म पश्चिमी अमेरिका के ओक्लाहोमा प्रांत के उन ओसेज इंडियन ट्राइव्स के सैकड़ों स्त्री पुरुषों के प्रति सिनेमाई श्रद्धांजलि है जिन्हें 1918-1931के दौरान पैसा पावर और संसाधनों पर कब्जा करने के लिए मार डाला गया था। ओसेज इंडियन जनजाति के इलाके में यह सारी लड़ाई तब शुरू होती है जब अचानक बंजर पथरीली धरती पर पेट्रोलियम के असीमित भंडार का पता चलता है और यहां के मूल बाशिंदे अमीर हो जाते हैं। यह फिल्म डेविड ग्रान के इसी नाम से प्रकाशित बेस्ट सेलर किताब पर आधारित है।

 

एक रहस्यमय इंसान अर्नेस्ट (लियोनार्दो डीकैप्रियो) प्रथम विश्व युद्ध से लौटकर अपने चाचा विलियम हेल (राबर्ट डी नीरो ) के यहां आता है। वह लालची, अति महत्वाकांक्षी, शराबी और झक्की किस्म का है। वह आसानी से अपने चाचा की अपराधिक साजिश का कमांडर बन जाता है। यहीं उसकी मुलाकात ओसेज इंडियन ट्राइव्स की सबसे आकर्षक महिला मौली बर्खर्ट से होती है जो अपनी मां लिजी क्यू की बीमारी से परेशान हैं। कुछ ही मुलाकातों में दोनो में प्रेम परवान चढ़ता है और वे शादी कर लेते हैं। बाहर से आया दबंग व्यापारी माफिया की तरह पेट्रोलियम के सारे संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है जिनपर मालिकाना हक ओसेज इंडियन ट्राईव्स के लोगों का है। अचानक इस ट्राइव्स के लोगों की हत्याएं होने लगती है। मौली चकित हैं कि आखिर उसके लोग एक एक कर क्यों मरते जा रहे हैं और जब वह अपनी सगी बहन अन्ना की क्षत विक्षत लाश देखती है तो भीतर से टूट जाती है। वह अपनी मां को खो चुकी है और उसे डर है कि कोई उसे भी खत्म कर देगा।

स्थानीय प्रशासन हत्यारे का पता नहीं लगा पाता। करीब साठ से भी अधिक लोगों की हत्या के बाद जांच के लिए वाशिंगटन डीसी से ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन के एक काबिल अफसर टाम ह्वाइट को भेजा जाता है। यहीं एजंसी आज फेडरल ब्यूरो आफ इंवेस्टिगेशन (एफ बी आई )के नाम से जानी जाती हैं। जांच जैसे जैसे आगे बढ़ती है, विलियम हेल और एर्नेस्ट के अपराधों से पर्दा उठना शुरू होता है। पता चलता है कि मौली ने जिस एर्नेस्ट से बेइंतहा प्यार किया, अपना सबकुछ सौंप दिया, वहीं अपने शातिर चाचा के कहने पर उसे डायबिटीज की दवा में धीमा जहर देकर मार रहा है । यह एक झूठी जहरीली प्रेम कथा है जो बाद में कई नाटकीय घटनाओं के बाद अंजाम पाती है। मुकदमा चलता है और सबको सजा होती है।

मार्टिन स्कारसेसे ने पूरी ईमानदारी से इतिहास की विलक्षण कहानी कही है। उनके गोरे अभिनेताओं ने ओसेज इंडियन ट्राइव्स चरित्रों को बखूबी निभाया है। खुद लिली ग्लैडस्टोन पूरी फिल्म में अपने स्वभाव और शांत अभिव्यक्तियों से मन मोह लेती है। एर्नेस्ट हालांकि मौली के प्रति भावुक और अपनी तरह से ईमानदार दिखने की कोशिश करता है पर अविश्वास, लालच और हिंसा की राजनीति सबकुछ नष्ट करती चलती है। विलियम हेल की भूमिका में राबर्ट डि नीरो इतने वास्तविक लगते हैं कि विस्मय होता है। यह एक ऐसी फिल्म है जो हमें बताती है कि आज जो अमेरिका हमारे सामने है वह कैसे वहां के स्थानीय नेटिव लोगों की लाश पर बना है। अंतिम दृश्य में एक आर्केस्ट्रा के जरिए फिल्म के निष्कर्ष बताए गए हैं और हम मार्टिन स्कारसेसे को प्रकट होते हुए देखते हैं और वे बताते हैं कि मौली ने एर्नेस्ट से तलाख लेकर दूसरी शादी की ओर 1937 में वह मर गई।

एर्नेस्ट से मौली की आखिरी मुलाकात का दृश्य बहुत ही मार्मिक है जिसमें लिली ग्लैडस्टोन शांत है और पूछती है कि उसने उसे डायबिटीज की दवा में मिलाकर धीमा जहर का इंजेक्शन देने की बात उससे क्यों छुपाई? इसी दृश्य में लियोनार्दो डीकैप्रियो की अभिव्यक्ति देखने लायक है – लाचार, पछताता हुआ, बेचैन और गहरे अवसाद में नि:शब्द। मार्टिन स्कारसेसे ने चरित्र चित्रण में कमाल की सावधानी बरती है और एक एक चरित्र वास्तविक लगते हैं। उन्होंने अमेरिकी सत्ता के पीछे के हिंसा, शोषण और लूट के छुपे हुए इतिहास को आज के संदर्भ में देखने की कोशिश की है। लियोनार्दो डीकैप्रियो का लिली ग्लैडस्टोन और राबर्ट डी नीरो के साथ की केमिस्ट्री गजब की है और पता ही नहीं चलता कि कब साढ़े तीन घंटे की फिल्म खत्म हो गई। 76 वें कान फिल्म समारोह में मार्टिन स्कारसेसे की यह फिल्म ‘ किलर्स आफ द फ्लावर मून ‘ मानवत के लिए एक एक्ट्रावगांजा है जिसका बड़े पैमाने पर स्वागत हो रहा है।

अजित राय

Recent Posts

पुरानी दिल्ली को मिलेगा नया पहचान-चिह्न: चांदनी चौक का टाउन हॉल बनेगा टूरिज्म और कल्चरल हब

दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) ने चांदनी चौक स्थित 160 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन…

5 minutes ago

दाढ़ी-टोपी में सफर मुश्किल, निशाने पर मुसलमान! हामिद अंसारी के बयान को मुस्लिम संगठनों ने किया सपोर्ट

Hamid Ansari Statement: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की सांप्रदायिकता और धार्मिक स्वतंत्रता पर की गई…

8 minutes ago

Afghanistan Drug Crackdown: 12 प्रांतों में 60 संदिग्ध गिरफ्तार, 29 किलो ड्रग्स जब्त; गुप्त लैब भी ध्वस्त

Afghanistan Drug Crackdown: अफगानिस्तान में एंटी-नारकोटिक्स पुलिस ने 12 प्रांतों में कार्रवाई कर ड्रग्स कारोबार…

14 minutes ago

‘होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलेंगे’ ईरान का अमेरिका को सीधा अल्टीमेटम, गालिबफ बोले- सैन्य ताकत से बनाएंगे दबाव

Mohammad Bagher Ghalibaf: ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने साफ कहा है कि…

18 minutes ago

‘BJP को रोकना है तो हमसे बात करो…’ UP चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने गठबंधन का दिया खुला ऑफर

2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अगर…

27 minutes ago