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cannes film festival

कान्स के रेड कार्पेट पर ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपनी खूबसूरती का जलवा तो बिखेरा ही, लेकिन इस बार महफिल उनकी बेटी आराध्या बच्चन ने लूट ली. डिनर के दौरान रेड सिल्क गाउन में नजर आईं आराध्या के इस बदले हुए रूप को देखकर फैंस कह रहे हैं कि उन्होंने कान्स में अपना 'अनऑफिशियल डेब्यू' कर लिया है.

कान्स फिल्म फेस्टिवल में जहाँ वेस्टर्न ड्रेसेस का बोलबाला है, वहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस हुमा कुरैशी ने पारंपरिक बनारसी साड़ी पहनकर महफिल लूट ली. 'बनारस के घाटों से फ्रेंच रिवेरा तक' के इस सफर की तस्वीरें हुमा ने इंस्टाग्राम पर शेयर की हैं, जिस पर फैंस से लेकर सेलेब्स तक जमकर प्यार बरसा रहे हैं.

आलिया भट्ट ने कान्स 2026 के रेड कार्पेट पर अपने फैशन का जलवा बिखेरा. पीच कलर के Tamara Ralph गाउन और अमरपाली के कीमती गहनों में सजी आलिया का यह 'परी' जैसा अवतार सोशल मीडिया पर छाया हुआ है.

Jafar Panahi Movie It Was Just an Accident: जफर पनाही ने 'इट वाज जस्ट ऐन एक्सीडेंट' के लिए 78वें कान फिल्म फेस्टिवल में पाल्मा डोर जीता. फिल्म में हिजाब कानून का प्रतिरोध दिखाया गया. ग्रैंड प्रिक्स 'सेंटीमेंटल वैल्यू' को मिला.

Alia Bhatt Cannes Look: कपूर खानदान की बहू आलिय भट्ट कान्स फिल्म फेस्टिवल के आखिरी दिन भी छा गईं. गाउन से शुरू किया लुक साड़ी पर जाकर खत्म हुआ. हालांकि एक्ट्रेस ने इस दौरान इतिहास भी रच दिया.

78वें कान फिल्म समारोह में अभय सिन्हा को इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म प्रोड्यूसर का उपाध्यक्ष चुना गया. यह भारतीय सिनेमा का सम्मान है. इंपा ने कान में स्टॉल लगाकर छोटे निर्माताओं को वैश्विक मंच दिया.

Cannes 2025: कान क्लासिक में 'अरण्येर दिन रात्रि' का प्रदर्शन, शर्मिला टैगोर और सिमी ग्रेवाल की उपस्थिति में हुआ. सत्यजीत रे की इस क्लासिक फिल्म को 55 साल बाद संरक्षित रूप में दिखाया गया.

Indian Film in cannes 2025: कान फिल्म फेस्टिवल में नीरज घायवान की फिल्म 'होमबाउंड' को दर्शकों से 10 मिनट तक तालियों के साथ जबरदस्त सराहना मिली, मार्टिन स्कॉर्सेसे भी फिल्म से बेहद प्रभावित हुए.

CANNES FILM FESTIVAL के नियमों के अनुसार ऐसी फिल्म को उद्घाटन फिल्म बनाया जा सकता है, जो उसी दिन फ्रांस के सिनेमा घरों में रिलीज हो रही हो. अब से पहले टॉम क्रूज 75वें कान फिल्म फेस्टिवल (2022) में अपनी फिल्म ‘टाप गन मावेरिक’ लेकर आए थे.

78 वें कान फिल्म फेस्टिवल की झलकियां देखने लायक हैं. इसमें दिखाया गया कि 1937 के स्टालिन युग में युवा प्रोसेक्यूटर अलेक्जेंडर कोर्निएव एक खून से लिखे पत्र से शुरू हुई यात्रा में एनकेवीडी के अत्याचारों का पर्दाफाश करता है, पर खुद जेल में बंद हो जाता है.