CANNES FILM FESTIVAL: ईरानी फिल्मकार जफर पनाही ने जीता सबसे बड़ा पुरस्कार Palme d’Or, जेल से रिहा होने के बाद हिजाब पर बनाई फिल्म
Jafar Panahi Movie It Was Just an Accident: जफर पनाही ने 'इट वाज जस्ट ऐन एक्सीडेंट' के लिए 78वें कान फिल्म फेस्टिवल में पाल्मा डोर जीता. फिल्म में हिजाब कानून का प्रतिरोध दिखाया गया. ग्रैंड प्रिक्स 'सेंटीमेंटल वैल्यू' को मिला.
CANNES FILM FESTIVAL: इंपा प्रमुख अभय सिन्हा चुने गए FIAPF के वाइस प्रेसिडेंट, भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर मिला सम्मान
78वें कान फिल्म समारोह में अभय सिन्हा को इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म प्रोड्यूसर का उपाध्यक्ष चुना गया. यह भारतीय सिनेमा का सम्मान है. इंपा ने कान में स्टॉल लगाकर छोटे निर्माताओं को वैश्विक मंच दिया.
देश में चल रहा है तरक्की और बदलाव का मोदी युग: डॉ. दिनेश शर्मा
सांसद ने चौपाल में आए भारी संख्या में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का आकर्षण पूरे देश में है। प्रधानमंत्री की गरीब कल्याण की योजनाओं ने देश के लोगों को बेहतर जीवन दिया है।
76वां कान फिल्म फेस्टिवल: फ्रांस की जस्टिन ट्रीएट की फिल्म ‘एनाटोमी ऑफ ए फाल’ को मिला बेस्ट फिल्म का ‘पाम डि ओर’ अवार्ड
कान फिल्म समारोह के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण खंड अन सर्टेन रिगार्ड में बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार ब्रिटेन के मौली मैंनिंग वाकर की फिल्म ' हाऊ टु हैव सेक्स ' को दिया गया.
कनु बहल की फिल्म ‘आगरा’- भारतीय परिवारों में सेक्स के दमन की अनकही कहानियां
76वें कान फिल्म समारोह के डायरेक्टर्स फोर्टनाइट में दिखाई गई कनु बहल की फिल्म 'आगरा' भारत के निम्न मध्यवर्गीय परिवारों में सेक्स के दमन से पनपते मनोरोग की गहराई से पड़ताल करती है। इस यह दूसरी भारतीय फिल्म है जो कान फिल्म फेस्टिवल के आफिशियल सेलेक्शन में है
76वां कान फिल्म फेस्टिवल: अनुराग कश्यप की ‘कैनेडी’- एक क्राइम ड्रामा की सटीक राजनीति
उदय शेट्टी (राहुल भट्ट) एक पूर्व पुलिस अधिकारी है जो अब मुंबई पुलिस कमिश्नर राशिद खान (मोहित टकलकर) के लिए हत्याएं करता है। दुनिया की नजर में वह मर चुका है और उसका नया नाम है - कैनेडी।
76वां कान फिल्म फेस्टिवल: युद्ध के खतरे के बीच फिनलैंड का दूसरा सच दिखाती है ‘फालेन लीव्स’
फिनलैंड जैसे अमीर देश में गरीबी के आखिरी पायदान पर जी रहे अंसा और होलप्पा की इस मार्मिक प्रेम कहानी के माध्यम से अकी कौरिस्माकी ने आधुनिक यूरोपीय पूंजीवादी सभ्यता का अंधेरा दिखाया है जिस तरफ हमारा ध्यान अक्सर नहीं जाता।
‘किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’- अमेरिका के महाशक्ति बनने की कहानी
ओसेज इंडियन जनजाति के इलाके में यह सारी लड़ाई तब शुरू होती है जब अचानक बंजर पथरीली धरती पर पेट्रोलियम के असीमित भंडार का पता चलता है और यहां के मूल बाशिंदे अमीर हो जाते हैं।
इस्लामिक स्टेट के खिलाफ एक औरत का सिनेमाई प्रतिरोध
प्रतियोगिता खंड में चीन के वैंग बिंग की लंबी डाक्यूमेंट्री 'यूथ'(स्प्रिंग) भी अपने राजनीतिक कथ्य की वजह से चर्चा में है।
76वां कान फिल्म समारोह: जापानी फिल्म मेकर हिरोकाजू कोरे ईडा की मूवी ‘मॉन्स्टर’ ने बटोरी सुर्खियां
इस बार कान फिल्म समारोह का जबरदस्त आकर्षण मशहूर स्पेनिश फिल्मकार पेद्रो अलमोदोवार की शार्ट फिल्म ' स्ट्रेंज वे आफ लाइफ' और उनकी मास्टर क्लास रही.





