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लुटेरा कहने की हिम्मत कैसे हुई…जनरल डायर की परपोती पर भड़के करण जौहर, जलियांवाला बाग को सही बताने पर की निंदा

जलियांवाला बाग हत्याकांड पर बनी डॉक्यूमेंट्री में कैरोलीन ने पीड़ितों को ‘लुटेरा’ बताया था. सामने आए वीडियो में कैरोलीन कहती नजर आई थीं, “इतिहास तो इतिहास है और हमें इसे स्वीकार करना होगा. जनरल डायर एक बहुत ही सम्मानित व्यक्ति थे.

अभिनेता करण सिंह त्यागी की अपकमिंग फिल्म ‘केसरी: चैप्टर 2’ सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार है. इस बीच अभिनेता ने जनरल डायर की परपोती कैरोलिन के ‘लुटेरे’ वाले बयान और जलियांवाला बाग हत्याकांड का बचाव करने के लिए उनकी निंदा की.

करण ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जनरल डायर की परपोती के उस इंटरव्यू को देखकर वास्तव में मैं क्रोध में आ गया था. उसने जलियांवाला बाग में आए लोगों को लुटेरा बताया था. यह फिल्म महत्वपूर्ण है क्योंकि आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि नरसंहार के बाद जनरल डायर की ब्रिटिश साम्राज्य में प्रशंसा होती थी और वह एक हीरो बन गया था.

हाल ही में जलियांवाला बाग हत्याकांड पर बनी डॉक्यूमेंट्री में कैरोलीन ने पीड़ितों को ‘लुटेरा’ बताया था. सामने आए वीडियो में कैरोलीन कहती नजर आई थीं, “इतिहास तो इतिहास है और हमें इसे स्वीकार करना होगा. जनरल डायर एक बहुत ही सम्मानित व्यक्ति थे.

लुटेरा कहने की हिम्मत कैसे हुई: करण जौहर

फिल्म निर्माता करण जौहर भी कैरोलिन पर पलटवार करते नजर आए थे. उन्होंने कहा, “न केवल एक भारतीय के रूप में, एक मानवतावादी के रूप में, बल्कि मैं केवल एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर इस बयान को देख रहा हूं, जिसके भीतर थोड़ी भी सहानुभूति और मानवता है, उस व्यक्ति को यह बयान जरूर गुस्सा दिलाएगा. मैं गोलमोल बातें नहीं करना चाहता और स्पष्ट रूप से कहता हूं कि वह ऐसा कैसे बोल सकती है? मैं बस यही कहूंगा कि वह कितनी हास्यास्पद थी और उसकी हिम्मत कैसे हुई? वह उन हजारों लोगों को लुटेरा कह रही थी? वे निर्दोष लोग थे, जो बैसाखी मनाने के लिए वहां जुटे थे.”

कहानी पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक है

करण सिंह त्यागी का मानना ​​है कि यह कहानी पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक है. उन्होंने कहा, “यह घटना वर्तमान समय को बयां करती है, जिसमें हम रह रहे हैं, जी रहे हैं. वास्तव में देखें तो यह एक ऐसी दुनिया है, जहां झूठी खबरें ज्यादा हैं. मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि जब लोगों ने अगले दिन जलियांवाला बाग के बारे में पढ़ा, तो सच्चाई को दबा दिया गया.”

उन्होंने यह भी बताया कि कैसे अंग्रेजों ने विरोध करने वालों को दबा दिया. नरसंहार के खिलाफ बोलने की हिम्मत करने वाली हर आवाज को चुप कराने की कोशिश की गई. कुछ क्षेत्रीय अखबार थे जो सच्चाई बताना चाहते थे, लेकिन उन्हें जला दिया गया. एक जीवित बचे व्यक्ति की लिखी प्रसिद्ध कविता ‘खूनी बैसाखी’ पर ब्रिटिश साम्राज्य ने प्रतिबंध लगाने की खूब कोशिश की. साम्राज्य ने इसे दबाने के लिए पीड़ितों को आतंकी बताते हुए एक झूठी कहानी फैलाना शुरू कर दिया. ऐसे में मुझे लगता है कि साल 2025 में लोगों के सामने लाने के लिए यह एक दिलचस्प कहानी है.”

एक्टर ने फिल्म में अक्षय कुमार के अभिनय की प्रशंसा करते हुए कहा, “उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया. मैं चाहता हूं कि दर्शक यह फिल्म देखें, क्योंकि यह उनकी सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों में से एक है. उन्होंने अपने दादा और पिता से इस हत्याकांड को लेकर कहानियां सुनी हैं, इसलिए उन्हें इससे व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस होता है.”

-भारत एक्सप्रेस



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