Abhijeet Dipke On CJP Protest Break: सड़कों पर गूंजते जोशीले नारे, पुलिस की लगातार बैरिकेडिंग, थाने के चक्कर और मुकदमों की भरमार अब शांत हो रहा है. पिछले करीब दो हफ्तों से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर चल रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सियासी जंग अब अचानक एक शांत मोड़ पर आ गई है. जब पूरा देश दीयों की रोशनी और त्योहारों की मिठास में डूबने की तैयारी कर रहा है, तब आंदोलन के मोर्चे पर डटे कार्यकर्ताओं को अभिजीत दीपके ने छुट्टी पर जाने को कहा है.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े सीजेपी (CJP) के राष्ट्रीय संयोजक और संस्थापक अभिजीत दीपके ने 16 मिनट का एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर अपने आंदोलन पर कुछ समय के लिए ‘फेस्टिवल ब्रेक’ लगाने का ऐलान कर दिया है.
कॉकरोचों को मिली छुट्टी (Abhijeet Dipke Latest Statement)
वीडियो संदेश में अभिजीत दीपके अपने जेल में बंद प्रमुख साथियों सौरभ दास और आशुतोष रांका का जिक्र करते हुए बेहद भावुक हो गए. उनकी आंखें नम हो गईं और गला रुंध गया. उन्होंने कहा कि संघर्ष अपनी जगह है, लेकिन अपनों का साथ सबसे जरूरी है.
Message to all cockroaches https://t.co/9e5yI9Nst0
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) October 20, 2026
दीपके ने कहा कि पिछले 10-12 दिनों में कार्यकर्ताओं ने बहुत लाठियां, हिरासत और मानसिक तनाव झेला है. अब समय आ गया है कि वे कुछ दिन सड़कों की गर्माहट छोड़कर घर के सुकून में लौटें. लड़ाई में उतरने का फैसला हमारा था, लेकिन उसकी चिंता और तकलीफ हमारे माता-पिता और बच्चों को उठानी पड़ रही है. इस त्योहारी सीजन में अपने परिवार, अपने करीबियों के साथ वक्त बिताएं.
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उन्होंने भावुक होकर बताया कि उनका एक व्हाट्सएप ग्रुप था जहां वे साथ में मीम्स शेयर करते थे. सौरभ और आशुतोष जेल में होने के कारण परिवार के साथ त्योहार नहीं मना सकेंगे, इसलिए उनके संघर्ष और त्याग को याद रखें.
नफरत का जवाब नफरत नहीं- दीपके का संदेश (Abhijeet Dipke Video Appeal Supporters)
आंदोलनकारियों पर हो रहे ट्रोलिंग और हमलों पर तीखा पलटवार करते हुए दीपके ने स्पष्ट किया कि उनकी भावुकता कोई लाचारी नहीं है. ट्रोल कहेंगे कि देखो रुला दिया! लेकिन हमारी भावनाएं कमजोरी नहीं, हमारी सबसे बड़ी मजबूती हैं. हम उनसे नफरत नहीं कर सकते जिनसे लड़ रहे हैं. नफरत के बदले नफरत फैलाना हमारा मकसद नहीं. दीपके ने कहा कि उनका रास्ता पूरी तरह महात्मा गांधी की अहिंसा और बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर के संवैधानिक मूल्यों पर टिका है.
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सियासत से सुकून की ओर एक ठहराव (Abhijeet Dipke Emotional Video Sourav Das)
लगातार तेज रफ्तार से भागती राजनीति में अक्सर कार्यकर्ताओं को सिर्फ संख्या और नारों का औजार मान लिया जाता है. ऐसे दौर में किसी आंदोलन के शीर्ष नेता का यह कहना कि ‘पहले घर जाओ और मां-बाप के साथ दीये जलाओ’, एक अनोखा मानवीय पहलू दिखाता है. हालांकि, आलोचक इसे पुलिसिया सख्ती और कानूनी शिकंजे के बाद पीछे खींचे गए कदम के तौर पर देख रहे हैं, लेकिन दीपके खेमे का मानना है कि यह कोई सरेंडर नहीं, बल्कि नई ऊर्जा बटोरने का एक जरूरी ठहराव है. त्योहार की यह छुट्टी कार्यकर्ताओं को कितनी राहत देगी और छुट्टियों के बाद यह आंदोलन किस करवट बैठेगा, यह देखना दिलचस्प होगा.
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