गुजरात के निकाय चुनाव परिणामों में जहां हर तरफ ‘केसरिया’ रंग छाया हुआ है, वहीं कच्छ जिले की भुज नगरपालिका के नतीजों (Gujarat Nikay Chunav Result) ने सबको ठिठकने पर मजबूर कर दिया है. दरअसल असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने भुज में अपना खाता खोलते हुए 3 महत्वपूर्ण सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है.
बता दें कि यह जीत इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि गुजरात जैसे राज्य में, जहां मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा है, वहां ओवैसी की पार्टी का जमीन तैयार करना किसी ‘सियासी धमाके’ से कम नहीं है.
कांग्रेस के ‘कोर वोट बैंक’ में बड़ी सेंध? (gujarat election results)
भुज में AIMIM की यह जीत सीधे तौर पर कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है. इसको लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी की पार्टी ने उन इलाकों में जीत हासिल की है जो पारंपरिक रूप से कांग्रेस के गढ़ माने जाते थे. मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ओवैसी के उम्मीदवारों को मिला समर्थन यह साफ करता है कि अब अल्पसंख्यक मतदाता एक नए विकल्प की ओर देख रहे हैं. यदि यही रुझान रहा, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए अपनी जमीन बचाना मुश्किल हो जाएगा.
ओवैसी का ‘गुजरात मिशन’ और भुज का संदेश
बताते चलें असदुद्दीन ओवैसी ने इन चुनावों (Gujarat Nikay Chunav Result) के लिए गुजरात में काफी पसीना बहाया था. उन्होंने खुद कई रैलियां कीं और ‘भागीदारी’ का नारा बुलंद किया. वहीं आज रिजल्ट के बाद भुज की 3 सीटें केवल शुरुआत मानी जा रही हैं. पार्टी के कार्यकर्ताओं में इस जीत से भारी उत्साह है. AIMIM का तर्क है कि वे केवल ‘वोट कटवा’ नहीं हैं बल्कि वे अब चुनाव जीतने और जनता का प्रतिनिधित्व करने की ताकत रखते हैं.
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भाजपा को क्या होगा फायदा?(AIMIM Bhuj Election Result)
दिलचस्प बात यह है कि ओवैसी की इस एंट्री को भाजपा के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है. चुनाव के जानकारों का कहना है कि जहाँ-जहाँ AIMIM मजबूत होगी, वहां विपक्षी वोटों का बंटवारा होगा. भुज में भी यही देखने को मिला, जहाँ कांग्रेस का वोट बैंक बंटने का सीधा या परोक्ष लाभ भाजपा को अपनी बढ़त बनाए रखने में मिला.
मुस्लिम राजनीति का नया चेहरा?
वहीं भुज नगर पालिका में AIMIM के पार्षदों की एंट्री यह संकेत दे रही है कि गुजरात के मुसलमानों के बीच अब ओवैसी की स्वीकार्यता बढ़ रही है. गोधरा और अहमदाबाद के बाद अब कच्छ जैसे सीमावर्ती जिले में ‘पतंग’ का उड़ना यह बताता है कि ओवैसी की रणनीति केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है बल्कि वे अब गुजरात के कस्बों और नगर पालिकाओं में भी गहरी पैठ बना रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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