Paper Leak Bill: पेपर लीक पर सख्ती के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में नया एंटी पेपर लीक बिल पेश किया. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक सदन में रखा. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की, जिसके बीच लोकसभा अध्यक्ष लगातार सदस्यों से शांत रहने और महत्वपूर्ण चर्चा में भाग लेने की अपील करते रहे.
पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में नया एंटी पेपर लीक बिल पेश किया. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में इस विधेयक को पेश करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना तथा पेपर लीक जैसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना है. सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा.
सदन में लगातार हंगामा
हालांकि, बिल पेश किए जाने के दौरान सदन का माहौल काफी हंगामेदार रहा. विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई. इस बीच लोकसभा अध्यक्ष लगातार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर बैठने और शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा में हिस्सा लेने की अपील करते रहे. उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विधेयक है, जिस पर सभी दलों को गंभीरता से अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए.
विपक्ष के हंगामे के बावजूद सरकार ने विधेयक को सदन के पटल पर रखा. लगातार शोर-शराबे के कारण सदन में सामान्य कामकाज प्रभावित रहा और कई बार कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की कोशिश की गई. हालांकि, शांति बहाल नहीं होने के कारण लोकसभा की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
बिल में क्या-क्या प्रावधान हैं?
पेपर लीक पर सख्ती बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ संसद में पेश किया है. इस बिल का मकसद परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों पर तेजी से कार्रवाई करना और दोषियों को कड़ी सजा दिलाना है.
बिल के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके. साथ ही जांच एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है. प्रस्तावित कानून के अनुसार, पेपर लीक के दोषियों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है. वहीं, अगर मामला संगठित अपराध या किसी बड़े गिरोह से जुड़ा पाया जाता है, तो कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है.
-भारत एक्सप्रेस
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