India China LAC Tension: भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने आधिकारिक पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश के असफिला और अन्य इलाकों में जुलाई से चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने (Face-off) की स्थिति बनी हुई है. इसके जवाब में ITBP अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक ड्रोन तकनीक, शौर्य कमांडो प्लाटून और अंडरग्राउंड बंकरों के जरिए चीन को करारा जवाब देने में जुटी है.
ITBP डीजी शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में जुलाई से चीनी पीएलए के साथ आमने-सामने की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि की है. असफिला जैसे इलाकों में चीनी सैनिकों की मौजूदगी का जवाब देने के लिए ITBP 4,000 करोड़ रुपये की योजना के तहत ड्रोन तकनीक, 10 हजार जवानों की ‘स्ट्राइक’ कॉम्बैट ट्रेनिंग, शौर्य कमांडो और भूमिगत बंकर तैयार कर सीमा की सुरक्षा को अभेद्य बना रही है.
अरुणाचल प्रदेश में चीन संग तनाव की आधिकारिक पुष्टि
आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने राजस्थान के अलवर में जवानों को संबोधित करते हुए यह आधिकारिक स्वीकारोक्ति की कि अरुणाचल प्रदेश में जुलाई से चीनी सैनिकों के साथ तनाव जारी है. उन्होंने बताया कि असफिला जैसे इलाकों में चीनी सैनिकों ने भारत के दावे वाली सीमा से महज 6-7 किलोमीटर दूर अपने तंबू गाड़ रखे हैं. 1962 के युद्ध की सालगिरह के आसपास भी यह तनाव बना हुआ है.
DG ITBP Shatrujeet Kapur ने कल 22 Oct को Rajasthan के Alwar में सालाना Himveer Samman समारोह में बोला:
“पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल में कई जगहों पर face-off हुआ है और वो अभी भी जारी है। हमारी नई Shaurya Commando टीमों ने वहाँ शानदार काम किया है।”
— Kunwarnarpat Singh🇮🇳 (@narpat_singh009) October 23, 2026
गलवान की झड़प से लिया सबक, बनाई ‘शौर्य कमांडो’ और ‘स्ट्राइक’ टीम
2020 में गलवान घाटी में चीनी पीएलए द्वारा पत्थरों, कंटीले डंडों और लोहे की छड़ों से किए गए हमले को ध्यान में रखते हुए ITBP ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. बल ने ‘स्ट्राइक’ नाम का विशेष कोर्स तैयार किया है, जिसके तहत करीब 10 हजार जवानों को क्लोज कॉम्बैट और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की ट्रेनिंग दी गई है. इसके अलावा, हर बॉर्डर बटालियन में ‘शौर्य कमांडो’ तैनात किए जा रहे हैं जो गलवां जैसी परिस्थितियों का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं.
आधुनिक युद्ध का नया हथियार: ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक
ITBP प्रमुख ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक युद्ध के तरीके अब पुराने हो चुके हैं और आधुनिक दौर में ड्रोन की भूमिका बेहद अहम हो गई है. गृह मंत्रालय से मंजूर 4,000 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण योजना में से 1,000 करोड़ रुपये सिर्फ ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए रखे गए हैं. ITBP खुद भी ड्रोन तैयार कर रही है और हर सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून गठित कर दी गई है.
भूमिगत बंकर, ऑल-ट्रेन वाहन और जवानों के लिए खास इंतजाम
अरुणाचल जैसे दुर्गम और शून्य से नीचे तापमान वाले इलाकों में जवानों को सुरक्षित रखने के लिए बड़े पैमाने पर अंडरग्राउंड शेल्टर (भूमिगत बंकर) बनाए जा रहे हैं. इसके साथ ही, सब-जीरो तापमान में गाड़ियों को एक बार में चालू करने के लिए ‘कोल्ड स्टार्ट किट’ और ऑल-ट्रेन वाहनों की व्यवस्था की गई है. जवानों को तनाव व सोशल मीडिया हनी ट्रैप से बचाने के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.
कूटनीतिक वार्ताओं के बावजूद जमीनी सीमा पर स्थिति जटिल
2020 के बाद से दोनों देशों में कई दौर की कूटनीतिक वार्ताएं हुईं, लेकिन जमीन पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं. हालांकि, ITBP का 24 अक्टूबर को मनाया जाने वाला 65वां स्थापना दिवस बल के इसी आधुनिक और मजबूत इरादों को दर्शाता है, जो देश की उत्तरी सीमा को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
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-भारत एक्सप्रेस
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