Avimukteshwaranand Magh Mela Controversy: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज के माघ मेले को छोड़ने का ऐलान का दिया है. जिसके बाह अब काशी रवाना हो गए हैं. तड़के सुबह एक प्रेस वार्ता मे उन्होंने कहा कि मन इतना व्यथित है कि बिना स्नान किए ही पावन स्थल से विदा ले रहे हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि प्रयाग हमेशा से शांति और आस्था की धरती रही है. यह घटना न सिर्फ आत्मा को झकझोरने वाली है बल्कि न्याय और मानवता पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है.
विवाद कहां से शुरू हुआ?
दरअसल18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के लिए जा रहे स्वामी की पालकी पुलिस ने रोक ली थी. जिसके चलते विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई. स्वामी अपने शिष्यों की शिखा पकड़कर घसीटने का पुलिस पर आरोप लगाया और शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए. जिसके बाद स्वामी ने 11 दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया.
प्रशासन के नोटिस पर और बढ़ा विवाद
नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के केस 3010/2020 का जिक्र करते हुए कहा गया कि स्वामी के पट्टाभिषेक पर फिलहाल रोक है. फैसला आने तक कोई भी शंकराचार्य नहीं बन सकता. नोटिस में कहा गया कि शिविर में बोर्ड पर खुद को शंकराचार्य घोषित कर रहे हैं जोकि कोर्ट के आदेश का सीधा अपमान है. नोटिस जारी करते हुए प्रशासन ने स्वामी से 24 घंटे में स्पष्टीकरण भी मांगा.
आरोप-प्रत्यारोपों का दौर
शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया. हालांकि अन्य शंकराचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बयान दिए. इसको लेकर स्वामी ने सरकार से माफी की मांग करते हुए कहा कि माफी मिले तभी वह स्नान करेंगे. बता दें कि विवाद औरर बढ़ने पर स्वामी ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी. जिसके बाद हालिया घटनाक्रम में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने स्वामी के समर्थन में इस्तीफा तक दे दिया. वहीं अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर ने भी रिजाइन कर दिया. जिससे यह विवाद अब राजनीति के साथ-साथ ब्यूरोक्रेसी के लिए भी गहरा संकट खड़ा करता हुआ दिख रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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