होली के रंग कैसे छुड़ाएं? आसान और असरदार 10 तरीके
अखिलेश यादव और अवधेश प्रसाद (फोटो ट्विटर)
Awadhesh Prasad: समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है. अखिलेश यादव बीजेपी को रोकने के लिए हर तरह की कोशिश रहे हैं और उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव अवधेश प्रसाद खूब नजर आ रहे हैं. हाल ही अखिलेश यादव कोलकाता गए थे इस दौरान भी ज्यादातर समय वह अखिलेश के साथ ही नजर आए. उनकी सपा अध्यक्ष के साथ लगातार नजदीकियां बढ़ती जा रही हैं.
कहा जा रहा है कि अवधेश प्रसाद सपा में वरिष्ठ नेता आजम खान की जगह लेते हुए दिख रहे हैं. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के विधानसभा बजट सत्र के दौरान भी मिल्कीपुर से विधायक अवधेश प्रसाद आजम खान की जगह बैठे हुए नजर आए थे.
हाल ही में अवधेश प्रसाद और अखिलेश यादव में बीच में काफी नजदीकियां देखी जा रही है. उन्होंने हमेशा से अखिलेश यादव का ही पक्ष लिया है. लेकिन एक समय ऐसा था जब उनका साथ होना अखिलेश के लिए मुसीबत बन गया था. यह तब की बात जब अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल के बीच काफी ज्यादा मतभेद चल रहे थे. उस समय चाचा शिवपाल का बड़ा वर्चस्व था. लेकिन मुलायम सिंह यादव ने साल 2012 में बहुत कोशिश करने के बाद अखिलेश यादव को सीएम बना दिया था. यहीं से अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच अंतर गहराने लगा.
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अखिलेश के सरकार में आने के बाद से ज्यादातर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और अखिलेश यादव के बीच खींचतान बढ़ने लगी थी. जिसमें शिवपाल यादव, आजम खान और अमर सिंह शामिल थे. ऐसा भी कहा जाता रहा है कि अखिलेश का कार्यकाल वो कम, शिवपाल और आजम खान ज्यादा चलाते थे. अखिलेश के कार्यकाल के दौरान कई मौके पर चाचा शिवपाल के साथ विवाद हुआ. जिसका असर टिकट बंटवारे पर पड़ा था. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में शिवपाल और अखिलेश की तकरार का पूरा असर टिकट बंटवारों में दिखाई दिया. दोनों ही एक दूसरे के करीबियों का टिकट काटने में लगे हुए थे.
जब विधानसभा चुनाव की शुरूआत हो रही थी तो अखिलेश यादव ने अपने करीबी मंत्री अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को अमेठी की जगदीशपुर विधानसभा से प्रत्याशी बनाया. लेकिन उनके बेटे का टिकट शिवपाल यादव ने काट दिया और विमलेश सरोज को टिकट दे दिया. इसके बाद अवधेश प्रसाद मुलायम सिंह की शरण में आए और फिर से अजीत प्रसाद को टिकट दे दिया गया.
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