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सवालों के घेरे में खाकी: सरेंडर करने आए अपराधी का एनकाउंटर कैसे? भागलपुर में छिड़ा बड़ा विवाद

Bihar Police Encounter Questions: बिहार के भागलपुर में स्थित सुल्तानगंज में रामधनी यादव के हुए एनकाउंटर की वजह से एक बहुत बड़ा विवाद छिड़ गया है. जहां पुलिस इस एनकाउंटर को मुठभेड़ कह रही, जबकि परिवार का आरोप है कि थाने में सरेंडर के बाद उसकी ‘हिरासत में हत्या’ कर दी गई.

Bhagalpur case image

अंजनी कुमार कश्यप/भागलपुर: सुल्तानगंज एनकाउंटर मामले में मृतक के परिजनों ने पुलिस पर आत्मसमर्पण के बाद हत्या करने का आरोप लगाया है. मृतक की बहू ने दावा है कि रामधनी यादव (Ramdhani Yadav) ने परिवार को बचाने के लिए थाने में सरेंडर किया था, लेकिन सीसीटीवी कैमरे बंद कर उनकी हत्या कर दी गई और बाद में इसे मुठभेड़ का रूप दे दिया गया.

थाने में मारपीट के बाद गोली मार दी

घटना के बाद रामधनी यादव की बहू बेबी कुमारी ने पुलिस की पूरी कहानी को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका दावा है कि पुलिस ने सुबह 4 बजे उन्हें घर से उठाकर थाने में नजरबंद कर दिया था. परिवार को पुलिसिया कार्रवाई से बचाने के लिए रामधनी यादव खुद सुबह 5 बजे निहत्थे थाने पहुंचे और आत्मसमर्पण किया.

आरोप है कि थाने के भीतर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और बाद में पीछे के हिस्से में ले जाकर गोली मार दी गई.

परिवार ने कइ सवाल खड़े किए

परिजनों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि जिस समय रामधनी यादव थाने में थे, उस दौरान वहां के सीसीटीवी कैमरे जानबूझकर बंद कर दिए गए थे. बेबी कुमारी का कहना है कि उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया था, जहां से उन्होंने रामधनी को ले जाते हुए देखा. परिवार का सवाल है कि यदि आरोपी पुलिस की गिरफ्त में था, तो फिर वह अचानक बाहरी स्थान पर मुठभेड़ में कैसे मारा गया?

पुलिस के पास कोई ठोस जवाब नहीं

मुठभेड़ के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस अधिकारियों के पास इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है कि एनकाउंटर असल में किस जगह हुआ. अधिकारियों की टालमटोल और विरोधाभासी बयानों ने मामले को और उलझा दिया है. शव सौंपने के दौरान भी पुलिस इस बात का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाई कि हिरासत में मौजूद व्यक्ति हथियारबंद मुठभेड़ स्थल तक कैसे पहुंचा.

मृतक के बेटे अंकित कुमार, बेटी प्रियंका कुमारी और बहू बेबी कुमारी ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. परिवार का आरोप है कि अब मामले को दबाने के लिए उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं. इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली और ‘न्याय के नाम पर एनकाउंटर’ की नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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