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समृद्धि यात्रा में ये क्या हो गया? सम्राट चौधरी के लिए मंच से गूंजा ये शब्द, जानें नीतीश कुमार का रिएक्शन

आज भागलपुर से शुरू हुई नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान मंच पर हुई एक चूक ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है.

रिपोर्ट- अंजनी कुमार कश्यप


आज बिहार के भागलपुर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा का चौथा चरण शुरू हुआ. लेकिन इस कार्यक्रम के दौरान एक छोटा सा मंचीय गलती बड़ा राजनीतिक चर्चा का कारण बन गई. सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार चल रहा था, लेकिन मंच से हुई एक छोटी सी चूक ने पूरे सूबे के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी.

क्या था पूरा मामला?

मंच पर नीतीश कुमार के साथ सूबे के दोनों उपमुख्यमंत्री भी मौजूद थे. कार्यक्रम के दौरान जब संबोधन की बारी आई, तो मंच संचालन कर रहे एंकर ने बीजेपी के नेता और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को भाषण के लिए आमंत्रित किया. पहली बार तो एंकर ने उन्हें ‘उपमुख्यमंत्री’ ही कहा, लेकिन जैसे ही सम्राट चौधरी अपनी कुर्सी से उठकर माइक की तरफ बढ़े, एंकर की जुबान फिसल गई और उन्हें ‘मुख्यमंत्री’ कहकर पुकार लिया.

हालांकि, सम्राट चौधरी ने स्थिति को संभाला. उन्होंने एंकर की बात पर कोई भी तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय, बड़े ही सौम्य तरीके से हाथ जोड़े, माइक संभाला और अपना भाषण शुरू कर दिया.

आखिर इस चूक के मायने क्या हैं?

बिहार की मौजूदा राजनीति को देखते हुए इसे हल्के में लेना मुश्किल है. दरअसल, पिछले काफी समय से बीजेपी के भीतर और बाहर इस बात की चर्चा आम है कि आने वाले समय में पार्टी का चेहरा कौन होगा. सम्राट चौधरी को बीजेपी ने जिस तरह से आगे बढ़ाया है, उससे यह संकेत मिलता है कि वे भविष्य के संभावित दावेदारों में सबसे आगे हैं.

BJP की नजर OBC वोट बैंक पर

बिहार में सत्ता की चाबी अक्सर जातीय समीकरणों के पास रहती है. सम्राट चौधरी कोइरी (कुशवाहा) समाज से आते हैं, जिसे बिहार में एक बेहद मजबूत और प्रभावशाली ओबीसी वर्ग माना जाता है. नीतीश कुमार (कुर्मी) और सम्राट चौधरी (कोइरी) की यह जोड़ी राजनीति में ‘लव-कुश’ समीकरण के नाम से जानी जाती है.

बीजेपी की रणनीति बहुत साफ है. पार्टी गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक, खासकर कुर्मी-कोइरी मतदाताओं को अपने पाले में मजबूती से बनाए रखना चाहती है. बिहार की करीब 7% आबादी इसी वर्ग से आती है, जो दर्जनों सीटों पर हार-जीत का फैसला करने की ताकत रखती है. ऐसे में मंच से सम्राट चौधरी को ‘मुख्यमंत्री’ पुकारा जाना, भले ही गलती हो, लेकिन इसने समर्थकों के मन में एक नई उम्मीद और विरोधियों के खेमे में नई चिंता पैदा कर दी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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