bharat bhusan tiwari case update
Bharat Bhushan Tiwari Case: भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में एक नया मोड़ सामने आया है. जिस स्थान पर ग्रामीण भरत भूषण तिवारी की स्मृति में स्मारक बनाने की तैयारी कर रहे थे, वहां प्रशासन ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है. इस कार्रवाई के बाद इलाके में नाराजगी का माहौल है और ग्रामीण प्रशासन से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं.
भरत भूषण तिवारी के स्मारक निर्माण पर प्रशासन की रोक
ग्रामीणों के मुताबिक, भरत भूषण तिवारी की याद को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से घटना स्थल पर स्मारक निर्माण की योजना बनाई गई थी. इसके लिए ईंट, पत्थर, बालू और अन्य निर्माण सामग्री भी पहले से ही एकत्र कर ली गई थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही निर्माण कार्य शुरू होने की तैयारी हुई, प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और काम रुकवा दिया.
सरकारी जमीन को लेकर बढ़ा विवाद
परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, अंचल अधिकारी आनंद प्रकाश ने स्पष्ट किया कि जिस भूमि पर स्मारक बनाने की तैयारी की जा रही है, वह सरकारी जमीन है. ऐसे में जिला प्रशासन से आवश्यक अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किए बिना वहां किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर निर्माण के लिए निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है.
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प्रशासन की इस कार्रवाई पर भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने नाराजगी जताई है. उनके भाई चंदन तिवारी का कहना है कि ग्रामीण किसी तरह का विवाद नहीं चाहते, बल्कि केवल भरत भूषण तिवारी की स्मृति को संरक्षित करने के उद्देश्य से स्मारक बनाना चाहते हैं. उनका कहना है कि प्रशासन को ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस मामले का सकारात्मक समाधान निकालना चाहिए.
ग्रामीणों ने भी प्रशासन के फैसले का किया विरोध
वहीं, मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने भी प्रशासन के फैसले का विरोध किया. उनका कहना है कि गांव के लोगों की सामूहिक इच्छा है कि भरत भूषण तिवारी की याद में स्मारक बनाया जाए. ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जमीन सरकारी है तो नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर स्मारक निर्माण की अनुमति दी जाए. फिलहाल प्रशासन की ओर से निर्माण कार्य पर रोक बरकरार है. अब पूरे मामले में जिला प्रशासन आगे क्या फैसला लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. आने वाले दिनों में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच इस मुद्दे पर क्या सहमति बनती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा.
भारत एक्सप्रेस
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